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इथियोपिया से दिल्ली तक: 4000 KM उड़कर भारत पहुंची ज्वालामुखी की राख

अफ्रीका के दूरस्थ रेगिस्तान में स्थित इथियोपिया के हेली गुब्बी ज्वालामुखी के अचानक फटने से उठा विशाल राख का गुबार भारत तक पहुंच गया। करीब 4000 किलोमीटर की यह भयावह यात्रा सुनकर किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह वास्तविक घटना है। 23 नवंबर 2025 को लगभग 10–12 हजार साल बाद पहली बार यह प्राचीन ज्वालामुखी सक्रिय हुआ और इसके विस्फोट ने आसमान में काले धुएं और राख का ऐसा तूफान खड़ा कर दिया, जिसने कुछ ही घंटों में लाल सागर, अरब प्रायद्वीप और अरब सागर को पार कर भारत के उत्तर-पश्चिम हिस्से तक दस्तक दे दी।

इथियोपिया का अफार क्षेत्र, जहां यह ज्वालामुखी स्थित है, दुनिया के सबसे गर्म और भूकंपीय रूप से सक्रिय इलाकों में से एक है। सुबह करीब 8:30 बजे हुए विस्फोट में राख का बादल 14–15 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच गया, यानी एवरेस्ट से भी ज्यादा ऊंचा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह धमाका किसी विशाल बम की तरह महसूस हुआ। पूरा इलाका अचानक राख की मोटी परत से ढक गया और दृश्यता लगभग खत्म हो गई। इस विस्फोट का संबंध अफ्रीकी रिफ्ट वैली की टेक्टोनिक गतिविधियों से माना जा रहा है, जहां पृथ्वी की परतें एक-दूसरे से अलग हो रही हैं।

विस्फोट कुछ घंटों में थम गया, लेकिन राख की यात्रा अब शुरू हो चुकी थी। वैज्ञानिकों ने बताया कि ऊपरी वायुमंडल में चलने वाली तेज हवाओं, यानी सबट्रॉपिकल जेट स्ट्रीम, ने इस राख को पकड़ लिया और 100–200 किमी/घंटा की रफ्तार से इसे पूर्व की ओर धकेलना शुरू किया। जेट स्ट्रीम ऊंचाई पर बहने वाली ऐसी तेज हवाएं होती हैं, जो मानो किसी हाई-स्पीड हाइवे की तरह काम करती हैं। इन्हीं हवाओं की मदद से राख इथियोपिया से सऊदी अरब, यमन, ओमान, और अरब सागर को पार करते हुए कुछ ही घंटों में गुजरात, फिर राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और अंततः दिल्ली-NCR तक पहुंच गई। टूलूज के VAAC (Volcanic Ash Advisory Centre) ने राख के तेजी से फैलने की पुष्टि की और चेतावनी जारी की।

भारत में सबसे तत्काल असर हवाई यात्रा पर पड़ा। डीजीसीए ने एयरलाइंस को अलर्ट जारी किया, क्योंकि ज्वालामुखीय राख जेट इंजनों में घुसकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। इसके चलते कोच्चि-दुबई, कोच्चि-जेद्दा, और KLM की एम्स्टर्डम–दिल्ली जैसी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इंडिगो, एयर इंडिया, और अकासा एयर ने पश्चिम एशिया के रूट पर उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दीं। मुंबई एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले अंतरराष्ट्रीय कैरियर्स को भी पाकिस्तानी एयरस्पेस से गुजरने वाले रूट बदलने पड़े।

दिल्ली की हवा पहले ही प्रदूषण के कारण बेहद खराब श्रेणी में थी, और ज्वालामुखीय राख ने इसे और ख़तरनाक बना दिया। हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस राख का असर 1–2 दिनों में कम हो जाएगा क्योंकि हवा की दिशा बदलते ही यह वातावरण में फैलकर कमजोर पड़ने लगती है। अभी तक इथियोपिया में किसी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन कई गांवों में राख जमने से पशुओं के लिए चारे की समस्या खड़ी हो गई है।

यह घटना इस बात की स्पष्ट याद दिलाती है कि पृथ्वी की भूगर्भीय घटनाएं कितनी विशाल और प्रभावशाली हो सकती हैं। एक महाद्वीप में हुआ विस्फोट महज 24 घंटे में दूसरे देश की हवा की गुणवत्ता, उड़ानें और मौसम को प्रभावित कर सकता है—और यह सब संभव होता है प्रकृति की अद्भुत शक्तियों और तेज हवाओं की जटिल प्रणाली के कारण।

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