अखिलेश के आरोपों पर योगी का जवाब, फॉर्म 6-7-8 की प्रक्रिया समझाई
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच फॉर्म 7 को लेकर छिड़े सियासी विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधान परिषद में जवाब देते हुए विपक्ष पर तीखा पलटवार किया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा फॉर्म 7 के दुरुपयोग के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम योगी ने कहा कि इस मुद्दे पर “इतनी चिल्लाहट” क्यों मचाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में मतदाता सूची का पुनरीक्षण भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत हो रहा है और इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होती। उन्होंने कहा कि आयोग जो दिशा-निर्देश जारी करता है, प्रशासनिक तंत्र उसी के अनुसार काम करता है, लेकिन सरकार इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होती।
सीएम योगी ने बताया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान करीब 2 करोड़ 88 लाख लोग या तो अनुपस्थित, मृत या स्थानांतरित पाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इन आंकड़ों को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना था कि फर्जी वोटिंग रोकने की कार्रवाई से ही कुछ दलों को परेशानी हो रही है, इसलिए वे फॉर्म 7 को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने फॉर्म 6, 7 और 8 की प्रक्रिया भी समझाई। सीएम के अनुसार, फॉर्म 6 नए मतदाता के नाम जोड़ने के लिए, फॉर्म 7 किसी नाम को हटाने के लिए और फॉर्म 8 विवरण संशोधन के लिए उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भौतिक रूप से उपस्थित हो जाता है तो फॉर्म 7 स्वतः निरस्त हो जाता है। ऐसे में इस प्रक्रिया पर अनावश्यक आरोप-प्रत्यारोप उचित नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस का उदाहरण देते हुए सपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि विधान परिषद अब कांग्रेस विहीन हो चुकी है और यदि यही स्थिति रही तो सपा भी शून्य पर पहुंच सकती है। उन्होंने विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से बचने की नसीहत दी और कहा कि अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप संस्थाओं की परिभाषा गढ़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।