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ईरान में हाहाकार: 100 शहरों में उग्र प्रदर्शन, 45 की मौत, इंटरनेट-फोन सेवाएं ठप

ईरान में हाहाकार: 100 शहरों में उग्र प्रदर्शन, 45 की मौत, इंटरनेट-फोन सेवाएं ठप

ईरान एक बार फिर गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। बीते 12 दिनों से जारी इस अशांति में अब तक 45 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें 8 नाबालिग भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने कई इलाकों में फोन और इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी हैं, जिससे ईरान का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट गया है।

विरोध की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के बाजारों में हड़ताल से हुई थी, लेकिन जल्द ही यह आंदोलन राजधानी तेहरान, मशहद, ईरानशहर, बंदर अब्बास समेत देश के छोटे-बड़े शहरों तक फैल गया। अब यह प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों के 100 से ज्यादा शहरों और कस्बों में फैल चुका है। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें भी देखने को मिली हैं।

आर्थिक संकट इस उबाल की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। ईरानी मुद्रा रियाल का मूल्य ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गया है, जबकि रोजमर्रा की चीजों की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर महंगाई, भ्रष्टाचार और सरकारी दमन के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। दूसरी ओर, खामेनेई सरकार इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दे रही है।

इस बीच ईरान से निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी की अपील ने हालात को और भड़का दिया। उनके द्वारा विरोध जारी रखने के आह्वान के बाद गुरुवार रात कई शहरों में अचानक हिंसा तेज हो गई। बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए, रैलियां निकाली गईं और कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर कब्जा कर लिया। हालात बेकाबू होते देख सरकार को भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती करनी पड़ी।

सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट और फोन सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगा दिए। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के अनुसार, ईरान इस समय लगभग पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विरोध-प्रदर्शनों की तस्वीरों और सूचनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने से रोकने के लिए उठाया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस संकट पर नजर रखी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की गई, तो अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” कर सकता है। ट्रंप की इस चेतावनी ने पहले से तनावपूर्ण हालात में नया भू-राजनीतिक दबाव जोड़ दिया है।

फिलहाल ईरान में प्रदर्शन काफी हद तक नेतृत्वहीन माने जा रहे हैं, लेकिन देश-विदेश से आ रही राजनीतिक अपीलें यह तय करेंगी कि यह आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है। बढ़ती मौतों, संचार प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों के बीच सवाल यही है कि क्या सरकार हालात संभाल पाएगी या ईरान में अस्थिरता और गहराएगी।

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