कर्नाटक में 16 जून से बंद हो सकती हैं बाइक टैक्सी सेवाएं! हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश, लाखों ड्राइवरों पर मंडराया संकट
कर्नाटक में ओला, उबर और रैपिडो जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, यदि राज्य सरकार 15 जून तक दोपहिया टैक्सियों के लिए स्पष्ट नीति नहीं बनाती, तो 16 जून से ये सेवाएं पूरे राज्य में बंद कर दी जाएंगी।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा है कि जब तक मोटर वाहन अधिनियम के तहत बाइक टैक्सियों को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई जाती, तब तक इन सेवाओं को अनुमति नहीं दी जा सकती। महाधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने दलील दी कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी किसी भी सेवा के लिए राज्य की नीति होना अनिवार्य है, केवल केंद्र सरकार के नियमों के आधार पर इन्हें नहीं चलाया जा सकता।
इस बीच, ओला और उबर ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया कि दोपहिया वाहन भी सार्वजनिक परिवहन का माध्यम हो सकते हैं। कंपनियों का तर्क है कि जब तक राज्य अपनी नीति नहीं लाता, तब तक केंद्र के नियमों के तहत सेवा दी जा सकती है।
रैपिडो ने कोर्ट को बताया कि इस आदेश से 6 लाख से ज्यादा ड्राइवर-पार्टनर्स की आजीविका पर असर पड़ेगा। कंपनी का कहना है कि उनके 75% राइडर्स पूरी तरह रैपिडो से होने वाली कमाई पर निर्भर हैं और वे औसतन ₹35,000 प्रति माह कमाते हैं। अब तक रैपिडो अपने ड्राइवरों को ₹700 करोड़ से अधिक का भुगतान कर चुका है और अकेले बेंगलुरु में ₹100 करोड़ का GST जमा कर चुका है।
एनआई टेक्नोलॉजीज (ओला), उबर इंडिया और रोपेन ट्रांसपोर्ट (रैपिडो) ने याचिका दायर कर सरकार से मांग की है कि बाइक टैक्सी को पीले नंबर प्लेट वाले परिवहन वाहन के रूप में मान्यता दी जाए। हालांकि, खंडपीठ ने इस संबंध में कोई अंतरिम राहत नहीं दी है।
अब यह मामला 24 जून को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जब तय होगा कि कर्नाटक में बाइक टैक्सी सेवाओं को कानूनी रूप से मंजूरी दी जाएगी या नहीं। तब तक के लिए ड्राइवरों और कंपनियों की नजरें कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।