कानपुर की गलियों से आसमान तक: टेंपो चालक से एयरलाइन मालिक बने श्रवण कुमार
लखनऊ। कानपुर की तंग गलियों से निकलकर देश के आसमान तक पहुंचने की यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं, लेकिन यह पूरी तरह हकीकत है। श्रवण कुमार विश्वकर्मा नाम के जिस युवक ने कभी टेंपो चलाकर अपनी जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ाई, वही आज एक एयरलाइन के जरिए लोगों को हवाई सफर कराने की तैयारी में है। मध्यम वर्गीय परिवार से आने वाले श्रवण का सपना था कि हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में सफर कर सके, और इसी सोच ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया।
करीब 26 महीने पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश की पहली एयरलाइन के रूप में शंख एयरलाइंस (Shankh Airlines) की नींव रखी। इस सपने को अब औपचारिक मंजूरी भी मिल गई है। 24 दिसंबर को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शंख एयरलाइंस को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया। इसके साथ ही अल हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को भी मंजूरी दी गई, जिससे भारतीय एविएशन सेक्टर में नए खिलाड़ियों की एंट्री का रास्ता साफ हुआ।
श्रवण कुमार विश्वकर्मा, शंख एयरलाइंस के फाउंडर और चेयरमैन हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ। वे बताते हैं कि पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगा और हालात ऐसे बने कि पढ़ाई जल्दी छूट गई। इसके बाद उन्होंने बिजनेस की राह पकड़ी। शुरुआत सरिया (TMT) के कारोबार से की, फिर सीमेंट, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कदम रखा। ट्रकों का बड़ा बेड़ा खड़ा किया और यहीं से उनकी पहचान एक सफल कारोबारी के रूप में बनने लगी।
एयरलाइन शुरू करने का विचार उनके मन में करीब 3–4 साल पहले आया। उन्हें लगा कि आने वाले समय में एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ने वाला है और आम आदमी के लिए सस्ती, भरोसेमंद और स्थिर किराए वाली एयरलाइन की कमी है। एक यात्रा के दौरान यह कमी उन्हें और ज्यादा महसूस हुई, यहीं से शंख एयरलाइंस का आइडिया जन्मा।
एयरलाइन के नाम को लेकर भी उनकी सोच साफ है। ‘शंख’ नाम उनकी पहले की कंपनियों से जुड़ा रहा है और इसका धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व उन्हें आकर्षित करता है। उनका मानना है कि शंख हर घर में होता है, लेकिन उसे बजाना हर किसी के बस की बात नहीं। वे इसी तरह अपनी कंपनी को आम लोगों से जोड़कर एक अलग पहचान देना चाहते हैं।
टिकट की कीमतों को लेकर श्रवण कुमार का दावा शंख एयरलाइंस को बाकी कंपनियों से अलग बनाता है। उनका कहना है कि उनकी एयरलाइन में डायनामिक प्राइसिंग नहीं होगी। यानी सुबह की टिकट शाम तक कई गुना महंगी नहीं होगी। होली, दिवाली, छठ, कुंभ जैसे त्योहारों या ज्यादा डिमांड के समय भी किराया आसमान नहीं छुएगा। उनका फोकस साफ तौर पर मिडिल क्लास पर है—तय किराया, सीमित मुनाफा और भरोसेमंद सेवा।
बड़ी एयरलाइंस जैसे इंडिगो और एयर इंडिया को लेकर भी श्रवण कुमार का नजरिया व्यावहारिक है। वे कहते हैं कि हर कंपनी अपनी जगह काम कर रही है। उन्हें प्रतिस्पर्धा से ज्यादा अपने काम और सेवा पर भरोसा है।
शंख एयरलाइंस की शुरुआत Airbus A320 विमानों से होगी। पहले Boeing 737 का प्लान था, लेकिन तकनीकी कारणों से Airbus को चुना गया। फिलहाल तीन विमान तैयार हैं। कंपनी का लक्ष्य 2025 तक 10 से ज्यादा विमान, 2026–27 तक 15–25 विमान और 2026 के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने का है।
शंख एयरलाइंस का हेड ऑफिस लखनऊ में होगा और पहली उड़ान भी उत्तर प्रदेश से ही शुरू की जाएगी—संभावित रूप से लखनऊ या जेवर एयरपोर्ट से। कंपनी का प्लान है कि कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे शहरों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और चेन्नई से जोड़ा जाए।
कंपनी की शुरुआत 2022 में Shankh Agency Pvt Ltd के नाम से हुई थी, जिसका शेयर कैपिटल करीब 50 करोड़ रुपये बताया जाता है। 26 अक्टूबर 2023 को इसका नाम बदलकर Shankh Aviation Pvt Ltd कर दिया गया। विमान लीज, फाइनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलाकर निवेश सैकड़ों करोड़ रुपये का है। हालांकि श्रवण कुमार अपनी नेटवर्थ को लेकर खुलकर आंकड़े नहीं बताते।
आज भी श्रवण खुद को ‘कानपुर का लड़का’ कहते हैं। गंगा, टेंपो और संघर्ष उनकी पहचान का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि जो इंसान नीचे से उठा होता है, वही आम आदमी की परेशानियों को सही मायनों में समझ सकता है। टेंपो से टेक-ऑफ तक की यह कहानी सिर्फ एक बिजनेस की नहीं, बल्कि हिम्मत, जोखिम और सपनों को सच करने की मिसाल है।