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डेढ़ साल में सोना 45% महंगा हुआ, आगे कीमतें और बढ़ेंगी या होगी भारी गिरावट ?

डेढ़ साल में सोना 45% महंगा हुआ, आगे कीमतें और बढ़ेंगी या होगी भारी गिरावट ?

2024 से अब तक सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। घरेलू बाजार में 2024 के दौरान सोने की कीमत में 27.24% की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 2025 में अब तक यह लगभग 18% महंगा हो चुका है। यानी बीते 15 महीनों में सोने की कीमतों में कुल 45% की बढ़त देखने को मिली है।

अब सवाल यह है कि क्या सोने की यह तेजी आगे भी जारी रहेगी, या इसमें किसी बड़ी गिरावट की संभावना है? अगर आप गोल्ड ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो क्या यह सही फैसला होगा? वहीं, अगर सोने की ज्वैलरी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो क्या अभी इंतजार करना बेहतर होगा? आइए जानते हैं सभी सवालों के जवाब।

सोने की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

बड़ौदा बीएनपी परिबा म्यूचुअल फंड के सीनियर फंड मैनेजर, गुरविंदर सिंह वासन के अनुसार, पिछले 15 महीनों में सोने की कीमतों में लगातार उछाल देखा गया है। इसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। जब भी दुनिया में संकट या अस्थिरता का माहौल बनता है, तब सोना “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश के रूप में उभरता है, जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है और कीमतें चढ़ने लगती हैं।

इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी मात्रा में सोने की खरीदारी भी इस बढ़ोतरी का एक अहम कारण है। कई देश अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने का भंडारण बढ़ा रहे हैं। इस ट्रेंड के जारी रहने की उम्मीद है, जिससे सोने की कीमतें आगे भी मजबूत बनी रह सकती हैं।

हालांकि, अल्पकालिक समय में कुछ स्थिरता या हल्की गिरावट भी देखने को मिल सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में सोने की कीमतों में मजबूती बनी रहने की संभावना है।

क्या गोल्ड ETF और म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए?

अगर आप लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करने की सोच रहे हैं, तो गोल्ड से जुड़ी एसेट्स (Gold ETFs, Gold Mutual Funds, Gold Index Funds) एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। ये न केवल अस्थिर बाजार में पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान करते हैं, बल्कि महंगाई से सुरक्षा भी देते हैं।

शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी से बचने के लिए निवेशकों को सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करने की सलाह दी जाती है। इससे बाजार में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाव हो सकता है और लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है

क्या सोने में मुनाफा बुक कर लेना चाहिए?

अगर आपने सोने में निवेश करके अच्छा मुनाफा कमा लिया है, तो अब आगे क्या करना चाहिए? इसका जवाब आपकी निवेश रणनीति और वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है

  • डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाए रखें – किसी भी एक एसेट क्लास पर पूरी तरह निर्भर न रहें, बल्कि पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें।
  • समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करें – निवेश को अपने लक्ष्यों के अनुसार बनाए रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा करें।
  • री-बैलेंसिंग करें (Rebalancing) – अगर आपके पोर्टफोलियो में किसी एक एसेट क्लास का भार जरूरत से ज्यादा हो गया है, तो फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद से उसे संतुलित करें।
  • लॉन्ग टर्म अप्रोच अपनाएं – सोने को हमेशा एक लॉन्ग टर्म एसेट के रूप में देखा जाता है, इसलिए इसमें निवेश करते समय धैर्य रखना जरूरी है।

क्या ज्वैलरी खरीदने के लिए इंतजार करना सही होगा?

अगर आप सोने की ज्वैलरी खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको थोड़ी सतर्कता बरतनी चाहिए। क्योंकि पिछले 15 महीनों में कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, ऐसे में कीमतों में कुछ स्थिरता या हल्की गिरावट की संभावना हो सकती है।

हालांकि, अगर आपको शादी-ब्याह या किसी अन्य विशेष अवसर के लिए सोना खरीदना है, तो बाज़ार की हलचल का इंतजार करने की बजाय धीरे-धीरे खरीदारी करना बेहतर हो सकता है। SIP की तरह स्टैगर तरीके से सोना खरीदना एक अच्छा विकल्प हो सकता है, ताकि उच्च कीमतों का असर कम हो सके।

  • सोने की कीमतों में पिछले 15 महीनों में जबरदस्त तेजी आई है, और लॉन्ग टर्म में यह ट्रेंड जारी रह सकता है।
  • गोल्ड ETFs और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।
  • शॉर्ट टर्म में कुछ स्थिरता या हल्की गिरावट संभव है, लेकिन लॉन्ग टर्म में सोना मजबूत रह सकता है।
  • निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर री-बैलेंसिंग करनी चाहिए।
  • अगर आप ज्वैलरी खरीदने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा इंतजार करना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन अगर खरीदारी करनी ही है, तो इसे धीरे-धीरे करना बेहतर रहेगा।

इसलिए, सोने में निवेश करते समय लॉन्ग टर्म दृष्टिकोण अपनाना और बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाना सबसे सही रहेगा।

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