डॉक्टरों ने बताए मिसकैरेज के मुख्य कारण, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
मां बनने का अनुभव हर महिला के जीवन का सबसे खास और भावनात्मक क्षण होता है। जब एक मां अपने भीतर एक नई ज़िंदगी को पनपते हुए महसूस करती है, तो वो उसे अपने खून से सींचती है, हर पल उसकी सलामती की दुआ करती है। हालांकि, प्रेगनेंसी का यह सफर हर महिला के लिए आसान नहीं होता। खासतौर पर गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने काफी संवेदनशील होते हैं। इसी दौरान गर्भपात (मिसकैरेज) का खतरा सबसे अधिक होता है।
गाइनकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा के अनुसार, कई बार छोटी-छोटी लापरवाहियां या जानकारी की कमी के कारण मां को अपने अजन्मे शिशु को खोना पड़ता है, जो बेहद दुखद और मानसिक रूप से तोड़ देने वाला अनुभव होता है।
क्यों होता है मिसकैरेज? ये हैं प्रमुख कारण
- जेनेटिक गड़बड़ी – भ्रूण में किसी प्रकार की आनुवांशिक समस्या
- हार्मोनल असंतुलन – जैसे पीसीओडी या थायराइड की समस्या
- गर्भाशय में कोई असामान्यता – जैसे रसौली या संक्रमण
- संक्रामक रोग – जैसे रूबेला या सीएमवी
- क्रॉनिक बीमारियाँ – मधुमेह, उच्च रक्तचाप
- अनुचित जीवनशैली – धूम्रपान, शराब, अत्यधिक कैफीन सेवन
- मानसिक या शारीरिक तनाव
- अत्यधिक वजन या बहुत कम वजन होना
- बिना सलाह दवाइयों का सेवन
मिसकैरेज के लक्षण क्या हैं?
- बुखार या कमजोरी महसूस होना
- पेट के निचले हिस्से या पीठ में तेज़ दर्द
- रक्तस्राव या स्पॉटिंग
- चक्कर आना, उल्टी होना या बेहोशी
- पेल्विक क्षेत्र में असहजता या भारीपन
गर्भपात से बचाव: अपनाएं ये उपाय
डॉ. मीरा बताती हैं कि जैसे ही प्रेगनेंसी का पता चले, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। गर्भस्थ शिशु और मां की सुरक्षा के लिए डॉक्टर जरूरी जांच और फोलिक एसिड की दवा देते हैं।
बचाव के लिए जरूरी बातें:
- पौष्टिक और संतुलित आहार लें – आपकी थाली में 5 रंग जरूर हों।
- स्मोकिंग, शराब, कैफीन, कच्चा मांस और अनानास से परहेज करें।
- पर्याप्त नींद लें – रात में कम से कम 8 घंटे और दिन में थोड़ी देर विश्राम।
- भारी सामान न उठाएं, न ही फर्श पर झुककर काम करें।
- भरपूर पानी पिएं – कम से कम 8-10 गिलास प्रतिदिन।
- पहले तीन महीनों में लंबी यात्रा और यौन संबंध से बचें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें।
- मानसिक शांति के लिए रोज़ मेडिटेशन करें।
- नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप कराते रहें।
गर्भावस्था एक बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता न सिर्फ मां के लिए बल्कि शिशु के सुरक्षित जन्म के लिए भी आवश्यक होती है। समय रहते सही जानकारी और डॉक्टर की सलाह लेकर मिसकैरेज जैसे दुखद अनुभव से बचा जा सकता है।