पंजाब में बच्चों के शरीर में बढ़ रहा सीसा: प्रदूषण और रासायनिक खादों का स्वास्थ्य पर भयंकर असर l
पंजाब के बच्चों में सीसा (Lead) और यूरेनियम समेत विषैले तत्वों का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ रहा है। हाल ही में पंजाब विश्वविद्यालय के भू-पर्यावरण अनुसंधान प्रयोगशाला और बाबा फ़रीद एनजीओ की एक पायलट स्टडी में 5 से 15 वर्ष के बच्चों के रक्त और बालों के नमूने लिए गए। 149 रक्त नमूनों में से करीब 26.2% नमूने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित स्तर से अधिक थे, जबकि बाल के नमूनों में 39% से अधिक बच्चे विषाक्त स्तर पार कर चुके हैं।
इस समस्या के लिए स्थानीय उद्योग, थर्मल पावर प्लांट, सीमेंट फैक्ट्रियां, और खेतों में इस्तेमाल होने वाली भारी मात्रा में रासायनिक खादें जिम्मेदार मानी जा रही हैं। इनसे निकलने वाला फ्लाई ऐश, जल प्रदूषण और मिट्टी में विषैले पदार्थों का जमाव बच्चों के शरीर में सीसे के स्तर को बढ़ा रहा है।
सीसा बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। इससे उनके शारीरिक विकास, मस्तिष्क की गतिविधि और संज्ञानात्मक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। अध्ययन में यह भी देखा गया कि प्रभावित इलाकों जैसे बठिंडा, रूपनगर, और चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों के नलों के पानी में भी यूरेनियम और आर्सेनिक का स्तर अधिक है, जिससे बच्चों का स्वास्थ्य और गंभीर हो रहा है।
पंजाब और चंडीगढ़ की मानवाधिकार आयोगों ने इस सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन माना है। उन्होंने राज्य की सरकारों को एक व्यापक सर्वेक्षण योजना बनाने, विषाक्तता विभाग स्थापित करने, शीघ्रता से चैलेशन थैरेपी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और औद्योगिक स्थलों की कड़ी जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्वच्छ पेयजल के लिए RO फिल्टर सिस्टम को स्कूलों, आंगनवाड़ियों, और ग्रामीण इलाकों में लागू करने का आदेश भी दिया गया है।
यदि राज्य सरकारें और उद्योग इस दिशा में ठोस कदम उठाते हैं, तो बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की जा सकती है। लेकिन विलंब या लापरवाही इस समस्या को और गहरा कर सकती है जिससे बच्चों को आजीवन मानसिक और शारीरिक क्षति हो सकती है।
पंजाब में बढ़ते प्रदूषण और रासायनिक खादों से होने वाले स्वास्थ्य संकट ने बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। इस स्थिति में तत्काल कार्रवाई आवश्यक है अन्यथा आने वाली पीढ़ी का स्वास्थ्य लगातार प्रभावित होता रहेगा।