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पी चुनाव से पहले भाजपा का ब्राह्मण कार्ड! ‘बटुक पूजा’ से साधने की कोशिश

पी चुनाव से पहले भाजपा का ब्राह्मण कार्ड! ‘बटुक पूजा’ से साधने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर ब्राह्मण समाज की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने मनोज पांडेय द्वारा आयोजित ‘बटुक पूजा’ कार्यक्रम को राजनीतिक गलियारों में विशेष महत्व के साथ देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह पहल ब्राह्मण समाज के बीच सकारात्मक संदेश देने और पार्टी के प्रति उनकी नाराजगी दूर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मनोज पांडेय को हाल ही में मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। इसके बाद उनके द्वारा आयोजित बटुक पूजा ने यह चर्चा छेड़ दी है कि क्या भाजपा ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि मनोज पांडेय खुद को पार्टी और सरकार में एक प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरे के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

पिछले कुछ समय से प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज की नाराजगी को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। कई राजनीतिक घटनाओं और नेताओं के बयानों ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया। ऐसे माहौल में भाजपा नेतृत्व भी यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि पार्टी में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा नहीं की जा रही है और उन्हें उचित प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मनोज पांडेय जैसे नेताओं की सक्रियता को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। भाजपा प्रत्यक्ष रूप से जातीय राजनीति पर जोर देने से बचती रही है, लेकिन विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश करती रही है। बटुक पूजा जैसे कार्यक्रम भी इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज हमेशा से एक महत्वपूर्ण वोट बैंक रहा है। राज्य की कुल आबादी में इस वर्ग की हिस्सेदारी लगभग 12 से 15 प्रतिशत मानी जाती है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले किसी भी राजनीतिक दल के लिए इस समुदाय का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के वर्षों में शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और कुछ सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर उठी बहसों ने भी ब्राह्मण समाज से जुड़े विमर्श को राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।

भाजपा के सामने चुनौती यह है कि वह अपने व्यापक सामाजिक समीकरण को बनाए रखते हुए ब्राह्मण समाज की चिंताओं को भी संबोधित करे। ऐसे में ब्रजेश पाठक और मनोज पांडेय जैसे नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि बटुक पूजा जैसी पहलों का चुनावी असर कितना होगा, इसका आकलन चुनाव परिणामों के बाद ही हो सकेगा, लेकिन इतना तय है कि इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण विमर्श को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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