पैरों की नसों में रुकावट आने पर होते हैं ये गंभीर लक्षण, डॉक्टर ने बताए इलाज के कारगर तरीके
हमारे शरीर में रक्त धमनियों के जरिये ऑक्सीजन और पोषक तत्व महत्त्वपूर्ण अंगों तक पहुँचते हैं। जब धमनियाँ अवरुद्ध हो जाती हैं, तो दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं। इसी तरह, जब पैरों की धमनियों में रुकावट आ जाती है, तो इसे पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) कहा जाता है। यह स्थिति पैरों में रक्त प्रवाह को बाधित कर सकती है, लेकिन बहुत से लोग इसके लक्षणों को पहचान नहीं पाते, जिससे इलाज में देरी हो जाती है। इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि धमनियाँ क्यों बंद होती हैं, किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए और कैसे अपनी रक्त वाहिकाओं की सेहत बनाए रखी जा सकती है।
धमनियाँ क्यों बंद होती हैं?
जब धमनियों की भीतरी दीवारों पर वसा और कोलेस्ट्रॉल का जमाव होने लगता है, तो धीरे-धीरे उनका मार्ग संकरा या पूरी तरह अवरुद्ध हो सकता है। यह स्थिति मुख्यतः धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और निष्क्रिय जीवनशैली के चलते विकसित होती है। समय के साथ, ये समस्याएँ रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त करती हैं, जिससे पैरों में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है और दर्द, संक्रमण या अंगों के नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।
पैरों में बंद धमनियों के लक्षण
- चलते समय पैरों में दर्द या ऐंठन
- पैरों में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना
- पैरों या तलवों में ठंडक लगना
- पैरों या उंगलियों पर ऐसे घाव बनना जो आसानी से ठीक नहीं होते
- पैरों की त्वचा का चमकदार या फीका पड़ जाना
- पैरों के नाखूनों का धीमा बढ़ना
अगर इनमें से कोई भी लक्षण नज़र आए, तो उसे अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। समय रहते निदान और उपचार से स्थिति को काफी हद तक सुधारा जा सकता है।
पैरों में बंद धमनियों का परीक्षण कैसे होता है?
विशेषज्ञ शारीरिक जांच के साथ-साथ कुछ परीक्षण करते हैं।
एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स (ABI) नामक परीक्षण में टखने और बाजू के रक्तचाप की तुलना की जाती है। इसके अलावा, डॉपलर अल्ट्रासाउंड, सीटी एंजियोग्राफी और एमआर एंजियोग्राफी जैसे इमेजिंग टेस्ट भी धमनियों में अवरोध की स्थिति का पता लगाने में मदद करते हैं।
इलाज के विकल्प
इलाज मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
हल्के मामलों में जीवनशैली में बदलाव, कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप नियंत्रित करने वाली दवाएं दी जाती हैं। जबकि गंभीर मामलों में रक्त प्रवाह को फिर से बहाल करने के लिए सर्जरी या एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है।
रोकथाम कैसे करें?
- नियमित रूप से व्यायाम करें
- धूम्रपान से पूरी तरह दूर रहें
- संतुलित और पोषक आहार लें
- मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का सही प्रबंधन करें
- नियमित स्वास्थ्य जांच करवाते रहें
समय रहते सतर्क रहने से पेरिफेरल आर्टरी डिजीज जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।