बदलते मौसम में बढ़ सकता है अस्थमा का खतरा: डॉ. अजय कुमार ने बताए बचाव के उपाय और जरूरी परहेज l
अक्टूबर महीने की शुरुआत के साथ मौसम में तेज बदलाव महसूस किया जा रहा है। ठंडी हवाएं, प्रदूषण का बढ़ता स्तर और धूल के कणों की बढ़ती मात्रा अस्थमा मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, तापमान में उतार-चढ़ाव और वायु गुणवत्ता में गिरावट अस्थमा अटैक को ट्रिगर कर सकती है।
एम्स के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अजय कुमार ने बताया कि हर वर्ष अक्टूबर से जनवरी के बीच अस्थमा पीड़ित मरीजों की संख्या औसतन 30–40% तक बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, “जब मौसम अचानक ठंडा होता है, हवा में आर्द्रता घटती है और प्रदूषण बढ़ता है। ये तीनों कारक मिलकर अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा देते हैं। ऐसे समय में मरीजों को खुद को खास तौर पर संभालना चाहिए।”
डॉ. कुमार के अनुसार, अस्थमा से ग्रस्त लोगों को बदलते मौसम में कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ रखनी चाहिए:
इनहेलर को हमेशा अपने साथ रखें और उसका प्रयोग डॉक्टर की सलाह अनुसार करें।
मास्क का उपयोग करें ताकि धूल, धुआं और पराग कण सीधे सांस में न जा सकें।
सुबह और देर शाम के समय बाहर व्यायाम या दौड़ने से बचें, जब प्रदूषण और नमी दोनों का स्तर ज्यादा होता है।
घर में एयर प्यूरिफायर या वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
मौसम के अनुसार कपड़े पहनें और ठंडी हवा से बचाव करें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जरूरी है।
धूम्रपान और परोक्ष धुएं (second-hand smoke) से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी के साथ ही एलर्जी ट्रिगर्स जैसे परागकण, धूल के जीवाणु, और फफूंद तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। डॉ. कुमार ने चेतावनी दी कि “कई मरीज इसे सामान्य खांसी-बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह गलती घातक साबित हो सकती है। अगर सांस लेने में तकलीफ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।”
देश के कई शहरों, खासकर दिल्ली-एनसीआर, पटना, और लखनऊ में हवा की गुणवत्ता गिरती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में अस्थमा और ब्रॉन्काइटिस के मरीजों को प्रदूषण की गंभीर स्थिति में घर से बाहर निकलना कम करना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में करीब 3 करोड़ से अधिक लोग अस्थमा से प्रभावित हैं, और इनमें से लगभग 25% मामले मौसम परिवर्तन के दौर में बिगड़ते हैं। विशेषज्ञ इस अवधि को “अस्थमा सीजन” कह रहे हैं।
डॉ. कुमार ने अंत में कहा, “अस्थमा एक नियंत्रित योग्य बीमारी है। नियमित दवा, सही परहेज और सावधानी से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। बदलता मौसम चुनौती है, लेकिन सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।”