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मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत को सहारा, छोटे देशों ने संभाली ऊर्जा सप्लाई

मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत को सहारा, छोटे देशों ने संभाली ऊर्जा सप्लाई

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा के चलते वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को संतुलित बनाए रखा है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक भारत के लिए यह संकट बड़ा झटका साबित हो सकता था, क्योंकि उसके कुल कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है। इसके बावजूद देश में ईंधन की उपलब्धता अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।

इस स्थिति से निपटने में भारत की कूटनीतिक रणनीति और आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की नीति अहम साबित हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक महीने में कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता में सुधार हुआ है। इस सुधार के पीछे मुख्य भूमिका अफ्रीका के छोटे-छोटे देशों और वैकल्पिक सप्लाई चैनल्स की रही है, जिन्होंने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अधिकारियों के मुताबिक, भारत ने पारंपरिक मिडिल ईस्ट सप्लाई पर निर्भरता कम करते हुए नाइजीरिया, अल्जीरिया, घाना, कांगो और अंगोला जैसे देशों से तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है। वहीं एलएनजी के लिए कैमरून, इक्वेटोरियल गिनी और मोज़ाम्बिक जैसे देशों के साथ भी संपर्क स्थापित किया गया है। इन नए स्रोतों ने सप्लाई चेन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

इसके अलावा रूस से तेल आयात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। मार्च महीने में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद फरवरी की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत तक बढ़ा दी। यह बढ़ोतरी उस समय हुई जब पश्चिम एशिया से सप्लाई बाधित हो रही थी। इस कदम ने भारत को ऊर्जा संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम करने में मदद की है।

वहीं सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भी वैकल्पिक पाइपलाइनों के जरिए तेल आपूर्ति जारी रखी है, जो होर्मुज मार्ग को बाईपास करती हैं। इससे भारत को सीमित मात्रा में ही सही, लेकिन निरंतर सप्लाई मिलती रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैश्विक संकट के बीच भारत की रणनीति ने यह साबित किया है कि समय रहते सप्लाई स्रोतों में विविधता लाना और मजबूत कूटनीतिक संबंध बनाए रखना कितना जरूरी है। मौजूदा हालात में भारत ने जिस तरह से छोटे और कम चर्चित देशों के साथ सहयोग बढ़ाया है, वह आने वाले समय में ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मजबूत मॉडल बन सकता है।

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