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राम मंदिर जमीन खरीद मामले में SIT के सामने पेश हुए संजय सिंह, सौंपे कथित घोटाले के दस्तावेज

राम मंदिर जमीन खरीद मामले में SIT के सामने पेश हुए संजय सिंह, सौंपे कथित घोटाले के दस्तावेज

राम मंदिर चढ़ावा और अयोध्या में जमीन खरीद से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में जांच तेज हो गई है। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह गुरुवार को विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष पेश हुए और उन्होंने अयोध्या में जमीन खरीद से जुड़े कई दस्तावेज जांच टीम को सौंपे। संजय सिंह ने दावा किया कि भगवान श्रीराम के नाम पर जमीन खरीद में बड़ा घोटाला हुआ है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने आरोप लगाया कि कुछ जमीनों की कीमत कम समय में दोगुनी दिखाकर खरीद-फरोख्त की गई। उनका कहना है कि करीब चार करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को कुछ ही समय बाद आठ करोड़ रुपये में खरीदा गया और इस पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों से संबंधित दस्तावेज और सबूत एसआईटी को सौंप दिए गए हैं तथा जांच एजेंसी ने मामले की जांच का भरोसा दिया है।

इस बीच, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के गठन के शुरुआती दौर में ही एक निजी ऑडिट फर्म ने वित्तीय प्रबंधन, दान की निगरानी, आभूषणों के रिकॉर्ड और प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर कमियों की ओर संकेत किया था। फर्म ने अपनी रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने और जवाबदेही तय करने के लिए कई सुधारात्मक सुझाव भी दिए थे।

बताया जा रहा है कि ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय रिकॉर्ड के उचित रखरखाव, डेटा प्रबंधन और प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अभाव में वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना कठिन होगा। इसके लिए लेन-देन, रिकॉर्ड प्रबंधन, मानव संसाधन और निगरानी तंत्र को व्यवस्थित करने की सिफारिश की गई थी।

सूत्रों का कहना है कि एसआईटी अब इस पुरानी ऑडिट रिपोर्ट को भी जांच का महत्वपूर्ण आधार बना सकती है। चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मामलों में सामने आ रही नई जानकारियों के बीच जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पहले से चेतावनी मिलने के बावजूद सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए। मामले की जांच जारी है और आगे आने वाली रिपोर्टों के आधार पर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

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