लगातार 5 महीनों की गिरावट के बाद, क्या मार्च में शेयर बाजार संभलेगा? जानें ताजा आंकड़ों के संकेत
शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। निफ्टी में लगातार पांच महीनों से गिरावट दर्ज की गई है, जो 1996 के बाद पहली बार हो रहा है। सितंबर में निफ्टी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 26,277.35 से 16% यानी 4,150 अंक नीचे आ चुका है। इस गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा, भारतीय कंपनियों के कमजोर वित्तीय नतीजे और सुस्त अर्थव्यवस्था जैसी कई वजहें हैं। इन कारणों से बाजार में निवेशकों का विश्वास डगमगाया है, जिससे लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या मार्च में इस गिरावट पर ब्रेक लगेगा?
क्या कहता है पिछले 10 साल का डेटा?
अगर पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च के महीने में बाजार ने सात बार सकारात्मक रिटर्न दिया है। 2016, 2017, 2019, 2021, 2022, 2023 और 2024 में निफ्टी में बढ़त दर्ज की गई थी, जबकि 2015, 2018 और 2020 में गिरावट देखी गई।
- 2016 में सबसे ज्यादा 11% की बढ़त दर्ज की गई, जो विदेशी निवेशकों की मजबूत खरीदारी की वजह से संभव हुई।
- 2023 में निफ्टी ने केवल 0.32% का रिटर्न दिया, जो मार्च महीने में सबसे कम था।
- 2020 में निफ्टी में 23% की भारी गिरावट आई थी, जो कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण हुई थी।
- 2015 में 4.6% और 2018 में 3.6% की गिरावट देखी गई थी।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
फरवरी के आखिरी कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों ने सबसे बड़ी बिकवाली की। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 11,639 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो पूरे फरवरी महीने की एक दिन की सबसे बड़ी बिकवाली थी। पूरे महीने के दौरान, उन्होंने कुल 34,574 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की। दिलचस्प बात यह है कि फरवरी में 20 कारोबारी सत्रों में से केवल दो दिनों में वे खरीदार रहे—4 फरवरी को उन्होंने 809.2 करोड़ रुपये और 18 फरवरी को 4,786.6 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
आगे क्या होगा?
मार्च में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेशकों की रणनीति, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगी। यदि एफआईआई की बिकवाली थमती है और बाजार को सकारात्मक आर्थिक संकेत मिलते हैं, तो यह गिरावट रुक सकती है। लेकिन यदि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी रहती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
शेयर बाजार में निवेश करते समय सतर्क रहना और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले अच्छी तरह से विश्लेषण करना चाहिए।