लोकसभा में पप्पू यादव का NTA पर बड़ा हमला, बोले- पेपर लीक की जड़ तक पहुंचे सरकार, चेयरमैन पर क्यों है इतनी मेहरबानी?
लोकसभा में पेपर लीक के मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों पर स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया है और एनटीए की भूमिका पर चुप्पी साध रखी है।
संसद में बोलते हुए पप्पू यादव ने कहा कि देशभर के लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की उम्मीद रखते हैं, लेकिन बार-बार पेपर लीक की घटनाओं ने उनका भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर भी पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। उनके अनुसार, केवल परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अपने भाषण में सांसद ने एनटीए के कामकाज और उसकी जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी को सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हर वर्ष करोड़ों छात्र विभिन्न परीक्षाओं के लिए आवेदन करते हैं और इससे बड़ी राशि एजेंसी के पास जाती है। ऐसे में इस धन के उपयोग, परीक्षा संचालन और जवाबदेही को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने यह भी मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आवश्यकता हो तो विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए।
पप्पू यादव ने अपने संबोधन में एनटीए के चेयरमैन की नियुक्ति और कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों पर पहले भी विवाद रहे हैं, उन्हें लगातार महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जाता रहा है। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि एक ही अधिकारी को बार-बार बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एनटीए के प्रशासनिक ढांचे और निर्णय प्रक्रिया की भी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
भाषण के दौरान सांसद ने पेपर लीक से जुड़े चर्चित मामलों और छात्रों की परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पारदर्शी व्यवस्था और समयबद्ध जांच की आवश्यकता है। उन्होंने कई देशों की परीक्षा प्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में भी ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर संसद में जोर-शोर से उठने के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार और एनटीए की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष और अन्य सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों पर क्या जवाब देती है और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आगे कौन से कदम उठाए जाते हैं।