ये स्पीकर है साहेब… जो उडा देता है सत्ता पक्ष के होश | Samvaad Live
दरअसल स्पीकर के मुद्दे को लेकर विपक्ष एनडीए को सेटेल होनें नही देना चाहता. टीडीपी के स्पीकर जीएमसी बालयोगी के एक फैसले के चलते अटल सरकार को एक वोट से गिरनें के मामले को एक नसीहत के तौर पर देख रही है. तो विपक्ष विगत दस सालो में सदन की कार्यावाही को तीसरे साल होनें देना नही चाह रही है. विपक्ष का मालूम है कि मोदी को तीसरे कार्यकाल में डिक्टेट किया जा सकत है बशर्ते स्पीकर भाजपा का ना हो. तो वहीं खबरे ये भी आ रही है कि भाजपा ओम बिरला को रिपीट करने का मन बना रही है. अगर वो इसमें कामयाब ना हो पायी तो फिर वो राजमुंदरी से सांसद पुरंदेश्वरी देवी का नाम स्पीकर के पद पर आगे बढ़ा सकती हैं. दरअसल पुरंदेश्वरी देवी चन्द्रबाबू नायडू की साली भी हैं तो वो कम्मा समुदाय से भी आती हैं. आंध्र प्रदेश की राजनीति में यह प्रभावशाली समुदाय है। कम्मा समुदाय को TDP का ट्रेडिशनल वोटर माना जाता है। साफ है कि डी पुरंदेश्वरी के बहाने भाजपा नायडू की पार्टी के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है. इस सेंधमारी से बचने के लिये नायडू बहुत अधिक पुरंदेश्वरी देवी का विरोध नही कर पाएंगे. तो वहीं विपक्षी दल वेट एण्ड वाच पालिसी अखतियार की हुयी है. कहा तो ये भी जा रहा है कि विपक्षी खेमा एनडीए के सहयोगी दलों के मूव का इन्तेज़ार कर कही है. लेकिन क्या सिर्फ बालयोगी प्रकरण के चलते ही स्पीकर का पद इस कदक सेन्सेटिव हो गया है. बिल्कुल भी नहीं. तो आईये जानते हैं उन मामलो को जब स्पीकर के चलते सत्ता पक्ष को खासी दुश्वारी झेलनी पड़ी थी.