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BJD-YSRCP का साथ मिला तो NDA को मिलेगा बड़ा फायदा, राज्यसभा में बदलेंगे समीकरण

BJD-YSRCP का साथ मिला तो NDA को मिलेगा बड़ा फायदा, राज्यसभा में बदलेंगे समीकरण

राज्यसभा में नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति पहले की तुलना में और मजबूत हो गई है। उच्च सदन में अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 245 सदस्यीय सदन में कुल 141 सांसद हैं। यदि मनोनीत और निर्दलीय सदस्यों में से 10 सांसदों का समर्थन भी गठबंधन को मिल जाता है, तो यह संख्या बढ़कर 151 तक पहुंच सकती है।

राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। ऐसे में एनडीए इस आंकड़े के काफी करीब पहुंच चुका है। राजनीतिक समीकरणों में बीजू जनता दल (BJD) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की भूमिका अहम मानी जा रही है। दोनों दल औपचारिक रूप से न तो एनडीए का हिस्सा हैं और न ही विपक्षी गठबंधन के, लेकिन कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर पहले भी केंद्र सरकार का समर्थन कर चुके हैं। यदि इन दोनों दलों का साथ मिलता है, तो एनडीए की संख्या लगभग 160 तक पहुंच सकती है, जिससे दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य और आसान हो जाएगा।

संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले इस बात की चर्चा भी तेज है कि केंद्र सरकार कुछ अहम विधेयकों को आगे बढ़ा सकती है। हालांकि सरकार की ओर से किसी विशेष विधेयक को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों, जैसे महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन, को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है।

राज्यसभा में बढ़ती संख्या के बावजूद लोकसभा में एनडीए के सामने अभी भी चुनौती बनी हुई है। वर्तमान में लोकसभा की तीन सीटें रिक्त हैं। यदि इन सभी सीटों पर भी एनडीए जीत दर्ज करता है, तब भी संविधान संशोधन के लिए आवश्यक 360 सांसदों के दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में राज्यसभा की कुछ रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव भी समीकरण बदल सकते हैं। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से खाली होने वाली सीटों को लेकर माना जा रहा है कि वहां विधानसभा में मजबूत स्थिति के कारण BJP को फायदा मिल सकता है। यदि ऐसा होता है, तो राज्यसभा में एनडीए की संख्या और बढ़कर 163 तक पहुंच सकती है, जो दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से केवल एक सीट कम होगी।

इसी बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ नेताओं की ओर से यह दावा भी किया गया है कि पार्टी के कुछ राज्यसभा सदस्य भविष्य में इस्तीफा दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो राज्यसभा के संख्या बल पर उसका असर पड़ सकता है और इससे एनडीए की स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो राज्यसभा में एनडीए लगातार मजबूत स्थिति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा में आवश्यक संख्या जुटाना अभी भी गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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