अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो किडनी का रखें खास ख्याल, वरना आ सकती है ट्रांसप्लांट की नौबत
अगर शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार पेशाब आना, अचानक भूख कम या ज्यादा लगना, घबराहट होना या शुगर लेवल का बढ़ना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर में कोई गंभीर बीमारी दस्तक दे रही है। डायबिटीज ऐसी ही एक बीमारी है, जो अगर समय रहते कंट्रोल न की जाए, तो यह शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। खासकर, डायबिटीज के मरीजों में किडनी खराब होने का खतरा ज्यादा होता है। आइए समझते हैं कि डायबिटीज कैसे किडनी को प्रभावित करती है और कब ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है।
कैसे डायबिटीज किडनी को नुकसान पहुंचाती है?
डायबिटीज से पीड़ित लोगों का ब्लड शुगर लेवल लगातार बढ़ा हुआ रहता है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती, तो यह खून को सही तरह से फिल्टर नहीं कर पाती और शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं।
- यूरीन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे किडनी पर अधिक दबाव पड़ता है।
- ब्लड शुगर हाई होने पर बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, जिससे यूरीन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
- धीरे-धीरे किडनी कमजोर होने लगती है और इसके फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
किडनी खराब होने के लक्षण
डायबिटीज के मरीजों में अगर किडनी प्रभावित हो रही है, तो शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे:
ब्लड प्रेशर का बढ़ना (हाई बीपी)
बार-बार पेशाब आना या पेशाब में झाग आना
भूख कम लगना और वजन घटने लगना
शरीर में कमजोरी और बार-बार थकान महसूस होना
सांस लेने में तकलीफ और पैरों में सूजन आना
अगर इन लक्षणों को समय रहते नजरअंदाज किया गया, तो किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर सकती है, जिससे मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।
किडनी क्यों है इतनी जरूरी?
किडनी का मुख्य कार्य खून को साफ करना और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालना है। लेकिन अगर डायबिटीज का असर किडनी पर पड़ता है, तो यह काम ठीक से नहीं हो पाता, जिससे शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
कब आ जाती है ट्रांसप्लांट की नौबत?
जब किडनी 90% से ज्यादा खराब हो जाती है, तब मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
डायलिसिस: यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मशीन के जरिए खून को फिल्टर किया जाता है, ताकि शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकाला जा सके।
किडनी ट्रांसप्लांट: अगर किडनी पूरी तरह फेल हो जाती है, तो मरीज को एक नई किडनी की जरूरत पड़ती है।
डायबिटीज के मरीजों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
कैसे बचा सकते हैं अपनी किडनी?
ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें।
नमक और शुगर का सेवन सीमित मात्रा में करें।
भरपूर मात्रा में पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें।
नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच करवाएं।
शरीर को एक्टिव रखने के लिए हल्का व्यायाम करें।
प्रोटीन और हेल्दी फूड्स का सेवन करें, फास्ट फूड से बचें।