अन्ना हजारे का सरकार से बड़ा संदेश— ‘सोनम वांगचुक के सब्र की परीक्षा न लें’
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार से अपील की है कि उनके धैर्य और संयम की परीक्षा न ली जाए। अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने वाले लोगों की आवाज़ सुनी जानी चाहिए और उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए।
अन्ना हजारे ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहा है, तो सरकार का दायित्व है कि वह संवाद का रास्ता अपनाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।
सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस बीच उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन को लेकर देशभर के कई सामाजिक संगठनों और समर्थकों की नजर बनी हुई है।
अन्ना हजारे ने सरकार से आग्रह किया कि वह टकराव की स्थिति से बचते हुए सकारात्मक पहल करे और वांगचुक से संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सहमति ही किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी समाधान होता है।
फिलहाल सोनम वांगचुक अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनके आंदोलन और स्वास्थ्य से जुड़े घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की लगातार नजर बनी हुई है।