किडनी डायलिसिस मरीजों के लिए अलर्ट: खानपान और रोज़मर्रा की 10 ज़रूरी सावधानियां, जिन्हें नज़रअंदाज़ करना हो सकता है खतरनाक l
गुर्दे (किडनी) हमारे शरीर से विषैले तत्व और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने का काम करते हैं। जब किडनी सही तरीके से काम करना बंद कर देती है, तो मरीज को डायलिसिस की ज़रूरत होती है। डायलिसिस के जरिए खून को मशीन से साफ किया जाता है। हालांकि, यह सिर्फ इलाज का एक हिस्सा है और मरीज को अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बहुत सावधानी बरतनी होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज के साथ-साथ खानपान और आदतों पर नियंत्रण न रखने से डायलिसिस का असर कम हो सकता है और जटिलताएं बढ़ सकती हैं। मरीज और उनके परिवार को यह समझना चाहिए कि दवाइयों के साथ-साथ सही डाइट, सीमित तरल पदार्थ और स्वस्थ आदतें ही जीवन को संतुलित और सुरक्षित बनाती हैं।
- तरल पदार्थ का सेवन नियंत्रित करें
पानी और अन्य तरल जैसे सूप, जूस, दूध की मात्रा डॉक्टर के बताए अनुसार ही लें।
ज़्यादा तरल लेने से शरीर में सूजन, सांस लेने में कठिनाई और हृदय पर दबाव बढ़ सकता है।
- नमक और सोडियम से परहेज़
ज़्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और शरीर में पानी जमा होता है।
डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, अचार, पैकेज्ड स्नैक्स और फास्ट फूड से बचें।
- पोटैशियम कंट्रोल करें
गुर्दे खराब होने पर शरीर अतिरिक्त पोटैशियम नहीं निकाल पाता, जिससे दिल से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं।
केला, आम, संतरा, टमाटर, आलू, पालक जैसी चीजें सीमित मात्रा में खाएं।
सेब, नाशपाती, अंगूर, पत्ता गोभी पोटैशियम में कम हैं और किडनी के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।
- फॉस्फोरस से सावधानी
डायलिसिस मरीजों को दूध, दही, पनीर, चॉकलेट और कोला ड्रिंक्स कम करने चाहिए।
फॉस्फोरस अधिक होने से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
- प्रोटीन का सही सेवन
डायलिसिस के दौरान शरीर से प्रोटीन भी निकल जाता है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन ज़रूरी है।
दाल, राजमा, चना और नॉनवेज डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह से उचित मात्रा में लें।
- वजन पर ध्यान दें
अपने ड्राई वेट (डायलिसिस के बाद का आदर्श वजन) को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।
हर सेशन से पहले और बाद में वजन मापें।
- दवाइयां नियम से लें
डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां और सप्लीमेंट सही समय पर लेना अनिवार्य है।
बिना सलाह के कोई दवा या घरेलू नुस्खा न अपनाएं।
- ब्लड प्रेशर और शुगर पर नियंत्रण
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़, किडनी फेलियर की मुख्य वजहें हैं।
समय-समय पर शुगर और बीपी चेक करें और नियंत्रित रखें।
- स्वच्छता का ध्यान रखें
डायलिसिस कैथेटर या फिस्टुला के आसपास सफाई बेहद ज़रूरी है ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
किसी भी तरह की सूजन, दर्द या लालिमा दिखने पर तुरंत डॉक्टर को बताएं।
- मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें
डायलिसिस लंबी और मानसिक रूप से थकाऊ प्रक्रिया हो सकती है।
परिवार का सहयोग, सकारात्मक सोच और हल्की सैर जैसी गतिविधियां मन को शांत रखती हैं।