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केरल के त्रिशूर में जर्जर इमारत ढही, तीन प्रवासी मजदूरों की मौत; पश्चिम बंगाल के दो युवक शामिल

केरल के त्रिशूर में जर्जर इमारत ढही, तीन प्रवासी मजदूरों की मौत; पश्चिम बंगाल के दो युवक शामिल

केरल के त्रिशूर जिले के कोडगरा इलाके में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब भारी बारिश के कारण एक पुरानी और कमजोर हो चुकी दो मंजिला इमारत भरभरा कर गिर गई। हादसे में तीन प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें से दो की पहचान पश्चिम बंगाल के रहने वाले युवकों के रूप में हुई है। यह हादसा सुबह करीब 6 बजे हुआ, जब उस इमारत में रह रहे 17 मजदूरों में से कई लोग काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी अचानक तेज आवाज के साथ इमारत ढह गई, जिससे मलबे में कई लोग दब गए। हादसे की खबर फैलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। मृतकों में से दो की पहचान राहुल (19) और रूपेल (21) के रूप में हुई है, जो दोनों पश्चिम बंगाल के निवासी थे। तीसरे मृतक की पहचान अभी बाकी है, लेकिन लापता अलीम नामक युवक की तलाश जारी थी, जिससे आशंका है कि वही तीसरा मृतक हो सकता है।सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव कार्य में स्थानीय लोग भी जुट गए। मलबा हटाने के लिए JCB और अन्य भारी मशीनें लगाई गईं। राहुल को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसने दम तोड़ दिया, जबकि रूपेल का शव मौके पर ही मिला। तीसरे शव को भी थोड़ी देर बाद मलबे से निकाला गया। हादसे के बाद प्रवासी मजदूरों के रहन-सहन और उनके लिए बनाए गए अस्थायी आवास की हालत पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत काफी पुरानी और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में थी, जिसे लेकर कोई भी मरम्मत या सुरक्षा उपाय समय रहते नहीं किए गए। जिला कलेक्टर समेत अन्य अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों की निगरानी की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को त्वरित सहायता देने का आश्वासन दिया। साथ ही इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस स्तर पर लापरवाही हुई। हालांकि घटनास्थल पर हालात नियंत्रण में रहे और स्थानीय प्रशासन, पुलिस व फायर ब्रिगेड की संयुक्त कोशिशों से राहत कार्य तेजी से किया गया, इसलिए एनडीआरएफ को बुलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। सभी शवों को त्रिशूर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, जहां उनका पोस्टमार्टम किया जा रहा है। यह घटना न केवल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि प्रवासी मजदूर किन खतरनाक हालात में अपना जीवन बसर कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन केवल जांच तक सीमित रहता है या भविष्य में ठोस कदम भी उठाए जाते हैं।

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