क्या होम आइसोलेशन में मरीज नहीं मान रहे नियम,मरीजों की संख्या में इजाफा
लखनऊ – प्रदेश सरकार ने गोरखपुर में 22 जुलाई से होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू हुई है। तब से लगभग 90 फीसदी कोरोना संक्रमितों ने इस सुविधा को पहली प्राथमिकता में चुना है। अब तक करीब आठ हजार लोगों ने होम आइसोलेशन में इलाज को वरीयता दी है। इनमें से तीन हजार का इलाज अब भी चल रहा है। दिक्क्त वाली बात ये है की होम आइसोलेशन में रहने वाले संक्रमित और परिजन नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं कर पा रहे हैं।
होम आइसोलेशन से जुड़े मरीजों की बात करे तो गोरखपुर के ही गोरखनाथ क्षेत्र में रहने वाले व्यापारी परिवार के दो सदस्य संक्रमित हैं। एक अस्पताल में भर्ती है। जबकि दूसरा होम आइसोलेशन में है। दो दिन बाद गुरुवार को रैपिड रिस्पांस टीम जब घर पर पहुंची तब परिवार के सदस्य ताला बंद कर घूमने गए थे। वेे कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं।
दरअसल होम आइसोलेशन में रहने वाले कुछ लोग कोरोना के प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। वे बेखौफ घूम रहे हैं। उनके कारण कॉलोनी के लोग और उनके परिजन संक्रमण के खतरे की जद में आ गए हैं।
गोरखपुर के सरकारी अस्पताल से जुड़े एक जूनियर इंजीनियर संक्रमित हैं। वह 20 दिन से होम आइसोलेशन में हैं। गुरुवार को उन्होंने जांच कराई। जांच में वह फिर पॉजिटिव मिले। होम आइसोलेशन में रहने के दौरान कुछ लोग सिर्फ 10 दिन तक ही एहतियात बरत रहे हैं। उसके बाद वेे बीमारी और इसके प्रसार को लेकर निश्चिंत हो जा रहे हैं। यह रवैया सही नहीं है।
चेस्ट के चिकित्स्क के अनुसार संक्रमित 10 दिन बाद ठीक हो जाते हैं लेकिन सभी नहीं। कुछ संक्रमितों में वायरस लोड 20 दिन तक मिला है। ऐसे लोग संक्रमण फैला सकते हैं। ऐसे में संक्रमित को सार्वजनिक जीवन में लौटने से पूर्व जांच जरूर करा लेनी चाहिए।