गलती से भी न करें इग्नोर ये 5 लक्षण, वरना चुपके-चुपके अपना शिकार बना लेगा ब्लड प्रेशर l
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती लाइफस्टाइल ने हेल्थ पर गहरा असर डाला है। अनियमित खानपान, तनाव, नींद की कमी और शारीरिक गतिविधियों में कमी की वजह से लोग कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इन्हीं में से एक है ब्लड प्रेशर (Blood Pressure), जिसे अक्सर लोग गंभीरता से नहीं लेते। शुरुआत में लक्षण हल्के लगते हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि यह लंबे वक्त तक शरीर के अंदर नुकसान पहुंचाता रहता है और पता तब चलता है जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। यह हार्ट अटैक, किडनी फेलियर और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का बड़ा कारण बन सकता है।
इन लक्षणों को कतई न करें नजरअंदाज
लगातार सिरदर्द
अगर बिना कारण बार-बार सिरदर्द हो रहा है, खासकर सुबह उठते समय सिर भारी लगता है, तो यह हाई बीपी का संकेत हो सकता है।
चक्कर आना या आंखों के सामने अंधेरा छा जाना
अचानक से चक्कर आना, नजर धुंधली होना या आंखों के सामने अंधेरा छा जाना ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होने का संकेत है।
बेचैनी और धड़कनों का तेज होना
जब दिल की धड़कन बार-बार तेज महसूस होने लगे और व्यक्ति अचानक बेचैन महसूस करे, तो यह भी हाई ब्लड प्रेशर का लक्षण माना जाता है।
थकान और नींद की समस्या
पर्याप्त आराम के बाद भी शरीर थका-थका लगे, और रात में चैन की नींद न आए, तो ये संकेत हृदय और ब्लड प्रेशर से जुड़े हो सकते हैं।
नाक से खून आना (Nose Bleeding)
बार-बार नाक से खून आना भी कई बार हाई ब्लड प्रेशर का अलर्ट सिग्नल होता है, जिसे अक्सर लोग हल्के में ले लेते हैं।
किन्हें ज्यादा खतरा?
मोटापा और असंतुलित खानपान वाले लोग
तनाव और ओवरवर्क की स्थिति में जीने वाले लोग
धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले
जिनके परिवार में पहले से हाई बीपी या हार्ट डिजीज का इतिहास है
विशेषज्ञों की राय है कि ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए सबसे जरूरी है लाइफस्टाइल मैनेजमेंट।
नियमित व्यायाम और योग करें।
खानपान में नमक और जंक फूड कम करें।
तनाव को कंट्रोल करने के लिए मेडिटेशन अपनाएं।
नींद पूरी लें और धूम्रपान-शराब से दूरी बनाएं।
समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराते रहें।
कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि अगर लोगों को शुरुआती लक्षणों पर ही अलर्ट कर दिया जाए तो वे बड़ी बीमारियों से बच सकते हैं। अधिकतर मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब उन्हें गंभीर समस्या हो चुकी होती है। यही वजह है कि डॉक्टर बार-बार जांच की सलाह देते हैं।