काफिला छोटा कर ऊर्जा बचत का संदेश दे रहे CM योगी, PM मोदी की मुहिम को मिली नई धार
लखनऊ। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा चुनौतियों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ईंधन और ऊर्जा संरक्षण को लेकर एक नई पहल को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के आह्वान को मुख्यमंत्री केवल सरकारी अभियान के रूप में नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत आचरण के माध्यम से भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी काफिले में वाहनों की संख्या कम कर एक स्पष्ट संदेश दिया है कि राष्ट्रहित के लिए व्यक्तिगत सुविधाओं में कमी करना भी जरूरी हो सकता है। उनका मानना है कि ऊर्जा संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। इसी सोच के साथ वह ऊर्जा बचत को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास कर रहे हैं।
हाल ही में आयोजित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण पर विशेष बल दिया। उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से अपील की कि वे पेट्रोलियम उत्पादों की खपत कम करने, बिजली की बचत करने और ऊर्जा के वैकल्पिक एवं प्रभावी उपयोग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटी-छोटी सावधानियां भी बड़े स्तर पर ऊर्जा संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने मंदिर प्रशासन और संबंधित कर्मचारियों को भी निर्देश दिए हैं कि बिजली का अनावश्यक उपयोग रोका जाए और ऊर्जा संसाधनों का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां आवश्यकता न हो, वहां बिजली और अन्य संसाधनों की बर्बादी नहीं होनी चाहिए। उनका मानना है कि ऊर्जा बचत की शुरुआत स्वयं से और अपने कार्यस्थल से होनी चाहिए।
गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने भी मुख्यमंत्री के इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ केवल लोगों से अपील नहीं कर रहे, बल्कि स्वयं उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उनके अनुसार मुख्यमंत्री जनप्रतिनिधियों को भी प्रेरित कर रहे हैं कि वे अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम करें, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं और जहां संभव हो सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाएं।
सांसद ने बताया कि मुख्यमंत्री खेती-किसानी में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर ईंधन की बचत के उपायों को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण को केवल प्रशासनिक नीति तक सीमित न रखकर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है, ताकि आने वाले समय में ऊर्जा संसाधनों का अधिक संतुलित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
बदलते वैश्विक हालात और ऊर्जा संकट की संभावनाओं के बीच मुख्यमंत्री का यह संदेश लगातार मजबूत हो रहा है कि ईंधन और ऊर्जा की बचत अब केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ी जिम्मेदारी भी है। सरकार की यह पहल धीरे-धीरे सामाजिक चेतना का रूप ले रही है और लोगों को ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज के विभिन्न वर्ग ऊर्जा बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को अपनाते हैं, तो इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा बल्कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह पहल राज्य में ऊर्जा संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखी जा रही है।