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नक्सलियों की कमर टूटी: टॉप कमांडर रामधेर मज्जी समेत 13 का सरेंडर, भारी हथियार भी सौंपे

नक्सलियों की कमर टूटी: टॉप कमांडर रामधेर मज्जी समेत 13 का सरेंडर, भारी हथियार भी सौंपे

छत्तीसगढ़ के बकरकट्टा क्षेत्र में सोमवार सुबह नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता दर्ज की गई। नक्सली संगठन के कुख्यात सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) रामधेर मज्जी ने अपने 12 साथियों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। लंबे समय से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के नक्सली नेटवर्क में टॉप लीडर के रूप में सक्रिय मज्जी पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। संगठन में उसकी हैसियत इतनी ऊँची थी कि उसे कुख्यात नक्सली हिडमा के समकक्ष माना जाता था। इसलिए उसका आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया है कि एमएमसी (महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़) ज़ोन अब लगभग नक्सल-मुक्त हो चुका है। यह इलाका वर्षों से नक्सली गतिविधियों का प्रमुख गढ़ रहा था, जहाँ सुरक्षा बलों को लगातार अभियान चलाने पड़ते थे। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व स्तर के नक्सली के साथ पूरे ग्रुप का सरेंडर इस क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरेंडर करने वालों में कुल 12 सक्रिय माओवादी शामिल थे, जिनमें कई के पास भारी हथियार मौजूद थे। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं—चंदू उसेंडी (DVCM – 30 कार्बाइन), जंकी (DVCM – इंसास), प्रेम (DVCM – AK-47), रामसिंह दादा (ACM – 303 राइफल), सुकेश पोट्टम (ACM – AK-47) और अन्य महिला कैडर जिनके पास इंसास, SLR और अन्य हथियार थे। इस सूची से स्पष्ट है कि संगठन के कई स्तरों पर सक्रिय कैडरों ने एक साथ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।

रामधेर मज्जी को नक्सली संगठन की शीर्ष श्रेणी का नेता माना जाता था। CCM के रूप में उसकी भूमिका संगठन की नीतियों, रणनीति और कार्रवाइयों तक प्रभावी रहती थी। बस्तर क्षेत्र सहित एमएमसी ज़ोन में उसकी पकड़ अत्यंत मजबूत थी और कई बड़े हमलों में उसकी संलिप्तता की आशंका जताई जाती रही है। लंबे समय से सुरक्षा बल उसके आत्मसमर्पण के लिए लगातार दबाव बना रहे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मज्जी का आत्मसमर्पण नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका है। इससे संगठन की साख कमजोर होगी और युवाओं में नक्सल विचारधारा का प्रभाव और घट सकता है। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति को भी इस घटना के बाद एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

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