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पंजाब में निजीकरण के खिलाफ किसानों का ऐलान, स्मार्ट मीटर उतारकर बिजली घरों में जमा

पंजाब में निजीकरण के खिलाफ किसानों का ऐलान, स्मार्ट मीटर उतारकर बिजली घरों में जमा

पंजाब में निजीकरण की नीतियों के खिलाफ किसानों और मजदूरों का विरोध तेज हो गया है। किसान मजदूर मोर्चा भारत, चैप्टर पंजाब के आह्वान पर राज्यभर में व्यापक प्रदर्शन किए गए, जिनमें लोगों ने अपने घरों में लगे स्मार्ट मीटर उतारकर नजदीकी बिजली घरों में जमा कराए। इस आंदोलन के जरिए मोर्चे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

किसान संगठनों की अपील पर अमृतसर, गुरदासपुर, होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, मोगा, लुधियाना, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, संगरूर, मानसा, पटियाला और मोहाली समेत कई जिलों में किसान बड़ी संख्या में बिजली घरों तक पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विश्व व्यापार संगठन (WTO)विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे संस्थानों के निर्देशों पर केंद्र सरकार कॉरपोरेट-समर्थक नीतियां लागू कर रही है।

मोर्चे का कहना है कि इन नीतियों के तहत बिजली, बीज बाजार, कृषि शोध, पानी, शिक्षा और खेती जैसे विषयों पर ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं, जो राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार यह कदम संघीय ढांचे और संविधान की भावना के खिलाफ हैं और इससे राज्यों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं।

आंदोलन के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि केंद्र की मोदी सरकार एक ओर जनविरोधी और काले कानून ला रही है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के अधिकारों में दखल दे रही है। किसान मजदूर मोर्चा ने यह भी कहा कि पंजाब सरकार केंद्र की नीतियों का विरोध करने के बजाय उनके साथ मिलकर कॉरपोरेट समर्थक फैसलों को लागू कर रही है।

मोर्चे ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में उठ रहे जन आंदोलनों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से बदनाम कर दबाने की कोशिश की जा रही है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल किसानों या मजदूरों तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों, विद्यार्थियों, शहरी व्यापारियों और छोटे दुकानदारों से भी जुड़ी है। उनका कहना है कि ऑनलाइन व्यापार और बड़े शॉपिंग मॉल धीरे-धीरे छोटे कारोबारियों, दुकानों और रेहड़ी-पटरी वालों को खत्म कर रहे हैं।

आज के कार्यक्रमों में पारित प्रस्तावों में यह भी कहा गया कि पंजाब में राज्य प्रायोजित नशा गंभीर समस्या बन चुका है, जिसे रोकने में केंद्र और राज्य सरकारें विफल रही हैं। इसके चलते बेरोजगार युवाओं को अपराध की ओर धकेला जा रहा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही है।

किसान मजदूर मोर्चा ने 24 जनवरी को बठिंडा में प्रेस की आवाज को दबाने के खिलाफ होने वाले आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। इसके साथ ही 5 फरवरी को पंजाब के विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव करने का ऐलान किया गया है और आम जनता से इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की गई है। इस आंदोलन को किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाबबीकेयू क्रांतिकारीबीकेयू दोआबाबीकेयू आजादबीकेयू बहिरामकेकिसान मजदूर हितकारी सभाबीकेयू भनेड़ी और बीकेएमयू सहित कई संगठनों का समर्थन प्राप्त है।

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