बैंक पर्सनल लोन डिफॉल्ट करने वाले ग्राहकों से वसूली कैसे करता है?
कई बार अचानक पैसों की जरूरत पड़ सकती है। अगर आपके पास इमरजेंसी फंड या बचत नहीं है, तो ऐसी स्थिति में कर्ज लेना पड़ सकता है। आमतौर पर लोग इस स्थिति में पर्सनल लोन का विकल्प चुनते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पर्सनल लोन की ब्याज दरें काफी ज्यादा होती हैं। इसलिए इसे तभी लेना चाहिए जब कोई और विकल्प न बचा हो। कई लोग अपने शौक पूरे करने या शेयर बाजार में निवेश करने के लिए भी पर्सनल लोन ले लेते हैं, लेकिन बाद में वे इसे चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं। अगर आप समय पर पर्सनल लोन नहीं चुका पाते हैं, तो बैंक आपके खिलाफ कई तरह की कार्रवाई कर सकता है।
1. कानूनी कार्रवाई
अगर लगातार रिमाइंडर भेजने के बाद भी लोन नहीं चुकाया जाता, तो बैंक कानूनी कदम उठा सकता है। इसमें आपके खिलाफ सिविल मुकदमा दायर किया जा सकता है। कोर्ट द्वारा लोन चुकाने का आदेश दिया जा सकता है और अगर भुगतान नहीं किया गया तो आपकी संपत्ति जब्त करके नीलाम करने का निर्देश भी दिया जा सकता है।
2. लोन रिकवरी एजेंट
बैंक, बकाया लोन की वसूली के लिए रिकवरी एजेंट या डेट कलेक्शन एजेंसी को नियुक्त कर सकता है। ये एजेंट कई बार दबाव बनाकर वसूली करने की कोशिश करते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है। कई मामलों में यह स्थिति काफी गंभीर हो सकती है।
3. सिबिल स्कोर पर नकारात्मक असर
अगर लोन का भुगतान नहीं किया जाता, तो आपका सिबिल स्कोर (क्रेडिट स्कोर) खराब हो जाता है। इसका सीधा असर भविष्य में लोन लेने की क्षमता पर पड़ता है। खराब क्रेडिट स्कोर होने की वजह से आपको बैंक से लोन लेने में कठिनाई होगी और अगर कोई बैंक लोन देने को तैयार भी होगा, तो वह बहुत अधिक ब्याज दर पर मिलेगा।
इसलिए, पर्सनल लोन लेने से पहले अच्छी तरह सोच-समझ लेना जरूरी है और इसे समय पर चुकाने की योजना बनानी चाहिए।