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भगवंत मान सरकार का फोकस किसानों और सेहत पर, कैबिनेट बैठक में लिए गए बड़े निर्णय

भगवंत मान सरकार का फोकस किसानों और सेहत पर, कैबिनेट बैठक में लिए गए बड़े निर्णय

मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में किसानों, स्वास्थ्य व्यवस्था और शहरी विकास से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे बड़ा फैसला गन्ना किसानों को राहत देने से जुड़ा है, जिसके तहत राज्य सरकार ने गन्ना उत्पादकों को ₹68.50 प्रति क्विंटल की सीधी सब्सिडी देने को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के साथ ही पंजाब एक बार फिर देश में सबसे ज्यादा गन्ना मूल्य देने वाला राज्य बन गया है।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, पेराई सत्र 2025-26 के दौरान निजी चीनी मिलें राज्य सहमत मूल्य (SAP) में से यह सब्सिडी सीधे किसानों को देंगी। पंजाब पहले ही ₹416 प्रति क्विंटल के SAP के साथ देश में शीर्ष पर है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹15 प्रति क्विंटल अधिक है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से गन्ना किसानों की आय सुरक्षा और मजबूत होगी और उन्हें समय पर बेहतर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

स्वास्थ्य और फिटनेस को बढ़ावा देने की दिशा में भी कैबिनेट ने बड़ा कदम उठाया है। ‘सीएम दी योगशाला’ परियोजना के तहत 1,000 योग प्रशिक्षक पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 में करीब ₹35 करोड़ का बजटीय प्रावधान किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस पहल के जरिए राज्य में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना और आम लोगों को योग से जोड़ना है।

स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए कैबिनेट ने मुक्तसर जिले के गांव बादल, तरनतारन जिले के खडूर साहिब, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जलालाबाद और फाजिल्का जिले के तृतीयक देखभाल केंद्र को पूर्ण नागरिक अस्पतालों के रूप में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS), फरीदकोट के अधीन स्थानांतरित करने को मंजूरी दी। इससे इन क्षेत्रों के लोगों को उन्नत चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों और बेहतर डायग्नोस्टिक सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

शहरी प्रशासन और भूमि प्रबंधन को लेकर भी कैबिनेट ने अहम फैसले लिए। पंजाब प्रबंधन और स्थानांतरण नगरपालिका अधिनियम, 2020 की धारा 4 के तहत दिशा-निर्देशों को अधिसूचित करने की मंजूरी दी गई, जिससे सरकारी विभागों, बोर्डों और सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़ी नगरपालिका संपत्तियों को सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए स्थानांतरित करना आसान होगा। इस कदम से विकास परियोजनाओं को गति मिलने, भूमि आवंटन में पारदर्शिता बढ़ने और सार्वजनिक भूमि के दुरुपयोग पर रोक लगने की उम्मीद है।

इसके अलावा, नगरपालिका सीमा के भीतर सरकारी-लाइसेंस प्राप्त परियोजनाओं में मौजूद परित्यक्त या सक्रिय रास्तों और खालों के बिक्री या विनिमय के जरिए हस्तांतरण की नीति को भी मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे रुकी हुई विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और शहरी नियोजन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

कैबिनेट ने PAPRA (पंजाब अफोर्डेबल प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट) के तहत लाइसेंस प्राप्त परियोजनाओं के लिए समय सीमा को 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक एक वर्ष के लिए बढ़ाने को भी मंजूरी दी। यह विस्तार प्रति एकड़ ₹25,000 के शुल्क पर अधिकतम तीन वर्षों तक दिया जा सकेगा, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र को राहत मिलने की संभावना है।

शहरी विकास से जुड़े एक अन्य फैसले में, जनवरी 2026 से नीलामी के लिए प्रस्तावित संपत्तियों पर अतिरिक्त फ्लोर एरिया अनुपात (FAR) शुल्क की गणना के फॉर्मूले को मंजूरी दी गई। साथ ही ई-नीलामी नीति 2025 में संशोधन को भी हरी झंडी दी गई, ताकि भविष्य में नीलाम की जाने वाली सभी श्रेणियों की संपत्तियों पर संशोधित नियम लागू हो सकें।

कैबिनेट ने अंत में पंजाब सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1994 में संशोधन को भी मंजूरी दी, जिसके तहत नियम 6A जोड़ा गया है। सरकार का कहना है कि इन सभी फैसलों से पंजाब में किसान कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी।

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