भारतीय परिवारों के पास है 25,000 टन सोना, दुनिया के कई देशों और रिजर्व बैंक से भी ज्यादा!
भारत में नागरिकों के स्वामित्व में सोने का भंडार लगभग 25,000 टन तक पहुंच गया है, जो विश्व के किसी भी देश की निजी संपत्ति में सोने की सबसे बड़ी मात्रा है। यह आंकड़ा अमेरिका, जर्मनी, चीन, जापान जैसे देशों के गोल्ड रिजर्व और यहां तक कि भारतीय रिजर्व बैंक की सरकारी गोल्ड रिजर्व से भी कहीं अधिक है। इस विशाल सोने की मात्रा की कुल कीमत लगभग 2.4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 188 लाख करोड़ रुपये) आंकी गई है, जो भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण आर्थिक संपत्ति के रूप में उभरती है.
भारत में सोने का महत्त्व केवल निवेश या संपत्ति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और पारंपरिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शादियों, त्योहारों और पूजाओं में सोने का उपयोग आम है और इसे समृद्धि, सौभाग्य और शुभता का प्रतीक माना जाता है। खासकर दक्षिण भारत में महिलाओं के पास असंख्य गहने होते हैं, जो पारिवारिक धरोहर के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी संचित होते हैं।
विश्व गोल्ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक भारतीय परिवारों के घरों में लगभग 25,000 टन सोना रखा गया है, जो अकेले ही विश्व के शीर्ष 10 केंद्रीय बैंकों के संयुक्त सामूहिक गोल्ड रिजर्व से अधिक है। उदाहरण के तौर पर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के पास 8,133 टन, जर्मनी के पास लगभग 3,300 टन, और भारतीय रिजर्व बैंक के पास केवल 876 टन सोना है।.
भारत में सोने का निवेश वर्ष दर वर्ष बढ़ रहा है। एक शेयरेड रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच, सोने पर आधारित ऋणों में 74.4% का उछाल आया है, जो दर्शाता है कि परिवार आर्थिक संकट के समय सोने को अपनी वित्तीय सुरक्षा के रूप में उपयोग करते हैं। साथ ही, सोने में निवेश इस समय शेयर बाजार की अनिश्चितता के कारण भी बढ़ रहा है। एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में भारी निवेश इसका प्रमाण है। इस व्यापक निजी गोल्ड रिजर्व की कीमत देश की नाममात्र GDP का 56% तक पहुंची है, जो अत्यंत ध्यान देने योग्य बात है.
भारतीय उपभोक्ता हर साल बड़ी मात्रा में सोना खरीदते हैं, खासकर त्योहारों, शादियों और अन्य सामाजिक अवसरों पर। हाल ही में कस्टम ड्यूटी में कटौती के कारण सोने की मांग और भी बढ़ी है। घरेलू मांग के कारण भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोने का आयातक भी है।