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महाराष्ट्र BMC चुनाव एग्जिट पोल : यूपी-बिहार विरोध ने कराया नुकसान, बीजेपी-शिंदे गठबंधन को फायदा

महाराष्ट्र BMC चुनाव एग्जिट पोल : यूपी-बिहार विरोध ने कराया नुकसान, बीजेपी-शिंदे गठबंधन को फायदा

मुंबई महानगर पालिका ( BMC चुनाव ) को लेकर आए Axis My India Exit Poll ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा संकेत दिया है। एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे द्वारा अपनाई गई उत्तर भारतीय विरोध की राजनीति इस चुनाव में उनके लिए नुकसानदेह साबित होती दिख रही है। यूपी-बिहार के लोगों को ‘बाहरी’ बताकर निशाना बनाने की रणनीति न तो मराठी मतदाताओं को पूरी तरह साथ ला सकी और न ही उत्तर भारतीय वोटरों का समर्थन हासिल कर पाई।

एग्जिट पोल के अनुसार, उत्तर भारतीय मतदाताओं का स्पष्ट ध्रुवीकरण बीजेपी-शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन के पक्ष में हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 68% उत्तर भारतीय वोट महायुति को मिले, जबकि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के गठबंधन को केवल 19% वोट हासिल हुए। यह रुझान साफ तौर पर दिखाता है कि सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर उत्तर भारतीय मतदाता एकजुट होकर उस गठबंधन के साथ गए, जिसने उन्हें भरोसा दिया।

सिर्फ उत्तर भारतीय ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय समुदाय का रुझान भी इसी दिशा में नजर आया। एग्जिट पोल के मुताबिक, करीब 61% दक्षिण भारतीय वोटरों ने बीजेपी गठबंधन को समर्थन दिया, जबकि उद्धव गुट (UBT) को केवल 21% वोट मिले। इससे संकेत मिलता है कि मुंबई का शहरी और कॉस्मोपॉलिटन मतदाता अब क्षेत्रीय अस्मिता की राजनीति से आगे बढ़कर विकास और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है।

मुस्लिम वोटों के बंटवारे की बात करें तो एग्जिट पोल में सबसे बड़ा हिस्सा कांग्रेस गठबंधन को जाता दिख रहा है, जिसे लगभग 41% मुस्लिम वोट मिले। इसके बाद उद्धव ठाकरे गुट को करीब 28% मुस्लिम वोट हासिल हुए। मुस्लिम वोटों का यह विभाजन बीजेपी के लिए अप्रत्यक्ष रूप से फायदेमंद साबित होता दिख रहा है। उद्धव ठाकरे को सेक्युलर छवि के जरिए मुस्लिम समर्थन तो मिला, लेकिन इसकी कीमत उन्हें अपने पारंपरिक मराठी हिंदुत्ववादी वोट बैंक के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी, जो बड़ी संख्या में बीजेपी की ओर शिफ्ट होता दिख रहा है।

एग्जिट पोल की सबसे अहम बात यह है कि मराठी वोटों का करीब 30% हिस्सा बीजेपी की ओर जाता नजर आ रहा है। यह संकेत देता है कि मुंबई की राजनीति में ‘ठाकरे ब्रांड’ अब मराठी मतदाताओं का एकमात्र प्रतिनिधि नहीं रह गया है। भावनात्मक और पहचान की राजनीति की जगह अब विकास, सुरक्षा और स्थिर शासन जैसे मुद्दे ज्यादा असर डाल रहे हैं।

अगर ये एग्जिट पोल नतीजों में बदलते हैं, तो यह मुंबई की राजनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करेगा। यूपी-बिहार विरोधी बयानबाजी इस चुनाव में उलटी पड़ती दिख रही है और मुंबई के मतदाताओं ने यह संदेश दिया है कि शहर किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि सभी का है। यह चुनाव परिणाम बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट के लिए मजबूती और ठाकरे परिवार की राजनीति के लिए आत्ममंथन का कारण बन सकता है।

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