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मिशन दोआबा: जालंधर से 2027 की तैयारी, सीएम भगवंत मान का नया गवर्नेंस मॉडल

मिशन दोआबा: जालंधर से 2027 की तैयारी, सीएम भगवंत मान का नया गवर्नेंस मॉडल

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज होती नजर आ रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की जालंधर में बढ़ती सक्रियता को केवल प्रशासनिक दौरा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी क्षेत्रीय रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। जालंधर, जो 2024 के उपचुनाव के दौरान राजनीतिक प्रयोग का केंद्र बना था, अब आम आदमी पार्टी (AAP) की आगामी चुनावी रणनीति का अहम आधार बनता दिख रहा है।

2024 के जालंधर उपचुनाव के दौरान भगवंत सिंह मान ने एक असामान्य कदम उठाते हुए शहर में किराए के मकान में रहना शुरू किया, बाद में सरकारी आवास लिया और वहीं एक कार्यात्मक कार्यालय भी स्थापित किया। उन्होंने घोषणा की थी कि दोआबा और माजहा क्षेत्र के लोगों को अब अपने काम के लिए चंडीगढ़ नहीं जाना पड़ेगा। “सरकार आपके द्वार” का संदेश देकर उन्होंने प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की छवि पेश की और जालंधर को अपनी “कर्मभूमि” बताया।

हालांकि उपचुनाव के बाद उनकी मौजूदगी कुछ समय तक कम दिखी, लेकिन हाल के दिनों में उन्होंने एक महीने में दो दौरे किए और अपने जालंधर आवास पर लोक मिलनी कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोग पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश देकर कई शिकायतों का समाधान करने का दावा किया। उन्होंने इसे “राजनीति से ऊपर” एक जनसुनवाई व्यवस्था बताया, लेकिन इसकी टाइमिंग और आवृत्ति को चुनावी तैयारी के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

एक वरिष्ठ AAP नेता के अनुसार, लोक मिलनी कार्यक्रम मुख्यमंत्री की सीधी पहुंच और जवाबदेही को मजबूत करता है। सार्वजनिक रूप से अधिकारियों को निर्देश देना प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश देता है, जिससे चुनाव से पहले सरकार की सक्रिय और संवेदनशील छवि बनती है।

वहीं, कांग्रेस के जालंधर जिला प्रधान राजिंदर बेरी ने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही मुख्यमंत्री की सक्रियता बढ़ी है, जबकि 2024 के उपचुनाव के बाद वे शहर में कम नजर आए थे। उनका कहना है कि जनता सब समझती है और यह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोआबा क्षेत्र चुनावी दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, जहां प्रवासी भारतीयों का प्रभाव, कृषि अर्थव्यवस्था और शहरी-ग्रामीण मिश्रण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 2022 में AAP ने राज्य में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, लेकिन दोआबा में पार्टी को 23 में से 10 सीटें ही मिली थीं। यह वही क्षेत्र था जहां पार्टी पूर्ण बहुमत के बावजूद क्लीन स्वीप नहीं कर पाई थी।

लोक मिलनी के दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी गिनाया। उन्होंने दावा किया कि बिना भ्रष्टाचार के 63,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी गईं, स्कूल ऑफ एमिनेंस की स्थापना की गई, शिक्षकों को विदेश प्रशिक्षण भेजा गया और 881 आम आदमी क्लीनिक के जरिए मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज, 19 टोल प्लाजा बंद करने और ग्रामीण सड़कों व सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का उल्लेख किया गया। महिलाओं के लिए प्रस्तावित ₹1000 मासिक सहायता योजना भी आगामी चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बनती दिख रही है।

जालंधर में बढ़ती सक्रियता को तीन प्रमुख उद्देश्यों से जोड़ा जा रहा है—दोआबा और माजहा में संगठनात्मक मजबूती, मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत छवि को और मजबूत करना, और 2027 से पहले सरकार की जवाबदेह व सुलभ छवि को स्थापित करना। आने वाले महीनों में यह रणनीति पंजाब की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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