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मेरठ में जाट संसद के 11 बड़े फैसले: अंतरजातीय विवाह पर रोक, शिक्षा पर जोर

मेरठ में जाट संसद के 11 बड़े फैसले: अंतरजातीय विवाह पर रोक, शिक्षा पर जोर

मेरठ जिले के सरधना तहसील के सकौती टांडा कस्बे में रविवार को जाट समाज के एक बड़े आयोजन के दौरान सामाजिक और शैक्षिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस मौके पर महाराजा सूरजमल की प्रदेश की सबसे बड़ी प्रतिमा का अनावरण किया गया, जिसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय जाट संसद की एक अहम बैठक भी आयोजित हुई। इस बैठक में समाज के प्रतिनिधियों और सरदारों ने मिलकर 11 प्रमुख प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए, जिनका उद्देश्य सामाजिक सुधार, शिक्षा और सामुदायिक एकता को मजबूत करना बताया गया।

बैठक में पहला प्रस्ताव युवाओं को अपने इतिहास से जोड़ने पर केंद्रित रहा। इसमें निर्णय लिया गया कि जाट समाज के युवाओं को अपने महापुरुषों के योगदान के बारे में जागरूक किया जाए और उनकी जयंती तथा पुण्यतिथि को उत्साहपूर्वक मनाया जाए। दूसरे प्रस्ताव में शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को तकनीकी और कौशल आधारित शिक्षा के साथ-साथ उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने और स्वरोजगार व व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।

सभा के दौरान तीसरे प्रस्ताव में सर चौधरी छोटूराम को भारत रत्न देने की मांग उठाई गई। चौथे प्रस्ताव में समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाने और युवाओं में जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया गया। वहीं पांचवें प्रस्ताव में अंतरजातीय विवाह पर रोक लगाने की बात कही गई, जिस पर सभा में विशेष चर्चा भी हुई।

इसके अलावा छठे प्रस्ताव में उच्च पदों पर आसीन जाट नेताओं और अधिकारियों से समाज के लोगों की निस्वार्थ मदद करने की अपील की गई। सभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा, एकता और सामाजिक अनुशासन बेहद जरूरी हैं। इस आयोजन को जाट समाज की एकजुटता और भविष्य की दिशा तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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