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यूपी राजनीति: संजय निषाद का दावा सच! BJP सहयोगी इस मुद्दे से परेशान?

यूपी राजनीति: संजय निषाद का दावा सच! BJP सहयोगी इस मुद्दे से परेशान?

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के सहयोगी दलों के बीच तनाव की आग लग गई है। निषाद पार्टी के प्रमुख और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के हालिया बयान के कुछ ही दिनों बाद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के नेता व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के एक विवादित बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने राजभर के बयान का कड़ा विरोध जताया है, जिससे BJP के सहयोगी दलों में दरार साफ नजर आ रही है। एक ओर संजय निषाद ने शांति और संवाद की अपील की है, वहीं पूर्व BJP नेता हरिनारायण राजभर ने ओम प्रकाश राजभर पर सीधा हमला बोला है। इस बीच, SBSP के नेता और राजभर के बेटे अरविंद राजभर ने ABVP को समर्थन देते हुए मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात का ऑफर दिया है।

यह विवाद बाराबंकी के श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (SRMU) से शुरू हुआ। 1 सितंबर 2025 को ABVP कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उनका आरोप था कि विश्वविद्यालय ने LLB कोर्स की मान्यता रद्द होने के बावजूद छात्रों को एडमिशन दिया, छात्रों को मनमाने जुर्माने लगाए, और दो छात्रों को बिना वजह निष्कासित किया। 15 अगस्त को ‘तिरंगा यात्रा’ का भी विरोध किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें 25 से अधिक कार्यकर्ता घायल हो गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद सीओ सिटी हर्षित चौहान को निलंबित कर दिया गया, कोतवाल सहित पांच पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया, और जांच के आदेश दिए गए।

इस घटना पर ओम प्रकाश राजभर ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “किसी को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए। अगर कोई कानून हाथ में लेगा तो पुलिस कार्रवाई करेगी।” हालांकि, ABVP कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राजभर ने उन्हें “गुंडा” कहा, जिससे विवाद भड़क गया। राजभर के इस बयान को असंवेदनशील और उकसाने वाला बताया जा रहा है। ABVP ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि राजभर माफी मांगें, वरना आंदोलन तेज होगा।

राजभर के बयान के बाद ABVP कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। 3-4 सितंबर 2025 को लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, वाराणसी, सीतापुर, बलिया, मऊ, आजमगढ़, श्रावस्ती, झांसी, कासगंज और अन्य जिलों में प्रदर्शन हुए।
लखनऊ में राजभर के हजरतगंज स्थित घर के बाहर सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंचे, पत्थरबाजी की, और एक महिला पुलिस अधिकारी पर हमले का आरोप लगा। पुलिस ने हल्की लाठी चलाई।

ABVP के राष्ट्रीय सचिव अंकित शुक्ला और अवध प्रांत सचिव पुष्पेंद्र वाजपेयी ने बयान को “असंवेदनशील” बताया और राजभर की बर्खास्तगी की मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि ABVP छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ता है, और राजभर का बयान छात्र आंदोलन को कमजोर करने वाला है। कुछ जगहों पर सपा कार्यकर्ताओं के घुसपैठ का आरोप भी लगा।

निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद ने इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिछले बयान (BJP नेताओं द्वारा सहयोगियों पर विवादित टिप्पणियां) को लेकर अगर कोई आपत्ति है, तो लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन शालीनता और संयम के साथ। हम छात्रों से अपील करते हैं कि हिंसा की बजाय संवाद का रास्ता अपनाएं।” निषाद ने हाल ही में गाजीपुर में एक कार्यक्रम में राजभर की तारीफ भी की थी, लेकिन विपक्ष (सपा, बसपा, कांग्रेस) पर हमला बोला था। उनका यह बयान राजभर विवाद के बाद आया, जो NDA में एकजुटता दिखाने की कोशिश लगता है।

SBSP के राष्ट्रीय महासचिव और ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर ने पिता के बचाव में कहा कि बयान को गलत तरीके से तोड़ा-मरोड़ा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया, “ओम प्रकाश राजभर ने कभी ‘गुंडा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने सिर्फ कहा कि कानून हाथ में लेने वालों पर पुलिस कार्रवाई होगी।” अरविंद ने ABVP के लाठीचार्ज की निंदा की और कहा, “हम छात्रों के साथ हैं। अगर ABVP चाहे, तो हम ओम प्रकाश राजभर को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करवा सकते हैं।” उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर पत्थरबाजी और गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए इसे “विपक्ष की साजिश” बताया। SBSP ने गृह मंत्री अमित शाह से ओम प्रकाश राजभर के लिए Z+ सिक्योरिटी की मांग भी की है।

BJP ने इस विवाद को जल्द सुलझाने की कोशिश की है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने SBSP नेताओं से मुलाकात की। पार्टी जानती है कि राजभर का राजभर समुदाय (पूर्वांचल के चंदौली, मऊ, गाजीपुर, वाराणसी में प्रभावशाली) 2027 विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण है। विपक्ष, खासकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे NDA में फूट का सबूत बताया और कहा, “BJP बांटने वाली और बेवफा पार्टी है।” ABVP ने लीगल नोटिस भी जारी किया है।

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