मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे मौन व्रत पर, आंदोलन को मिला बड़ा साथ जंतर-मंतर पर अफरा-तफरी, छात्रों और निहंगों के बीच धक्का-मुक्की से बढ़ा तनाव PM मोदी के ऐलान पर राहुल गांधी का पलटवार, रखीं 3 बड़ी मांगें CJP Protest: दिल्ली में बवाल, 16 मेट्रो स्टेशन बंद; सरकार से बातचीत को तैयार CJP पंजाब में बनाए जाएंगे 10 लाख नए राशन कार्ड 22 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन :मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान PM मोदी का राहुल गांधी पर तंज: मैं 56 साल के युवा की बात नहीं, 28 साल के युवाओं की बात कर रहा हूं सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल शिफ्ट करने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई जंतर-मंतर से अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया, संसद मार्च के बीच बड़ी कार्रवाई CJP प्रवक्ता सरकार से मिलने पहुंचे, संसद मार्च पर बढ़ी सियासी हलचल ‘हर अभद्र शब्द अश्लील नहीं’— सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

1978 के दंगा पीड़ित परिवार को आखिरकार मिला इंसाफ, घर और जमीन हुए वापस

1978 के दंगा पीड़ित परिवार को आखिरकार मिला इंसाफ, घर और जमीन हुए वापस

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 1978 के दंगों के दौरान विस्थापित हुए एक हिंदू परिवार को लगभग 47 साल बाद अपनी खोई हुई संपत्ति वापस मिल गई। दंगों में बलराम माली की हत्या के बाद उनके परिवार को अपनी जमीन और घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। अब प्रशासन ने उनकी 15,000 वर्ग फीट की जमीन पर कब्जा दिलाने का काम किया है, जिस पर वर्षों से एक स्कूल संचालित हो रहा था।

दंगों के बाद बलराम माली के तीनों बेटे अलग-अलग जगहों पर जाकर बस गए। रामभरोसे ने अपनी बहन के घर नरौली में शरण ली, नन्हूमल चंदौसी में रहने लगे, जबकि तुलसीराम संभल में किराए के मकान में रहने लगे। वर्षों तक यह परिवार अपनी जमीन और घर से जुड़ी उम्मीदें खो चुका था।

हालांकि, 24 नवंबर 2024 के बाद प्रशासन द्वारा मामले पर ध्यान देने के बाद स्थिति बदल गई। रामभरोसे के परिवार ने अधिकारियों से संपर्क किया और अपनी समस्या को उठाया। जांच में पाया गया कि उनकी जमीन पर डॉ. शाबेज द्वारा संचालित “आजाद जन्नत निशा कन्या माध्यमिक विद्यालय” चल रहा था।

मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम वंदना मिश्रा ने कार्रवाई शुरू की। उन्होंने सुनिश्चित किया कि परिवार को उनकी जमीन वापस दिलाई जाए। प्रशासन ने 15,000 वर्ग फीट में से 10,000 वर्ग फीट जमीन पर परिवार का कब्जा दिला दिया।

एसडीएम वंदना मिश्रा ने कहा कि यह कदम न केवल परिवार को न्याय दिलाने के लिए था, बल्कि समाज को यह संदेश देने के लिए भी है कि अवैध कब्जों को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन हमेशा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

47 साल बाद न्याय मिलने से परिवार के साथ-साथ समाज के लोगों में भी प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। यह घटना दर्शाती है कि सही समय पर उचित कदम उठाने से न्याय संभव है

Share This
अगला लेख → राजस्थान में साइबर ठगों का भंडाफोड़, खेत से चल रहा था ठगी का…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताज़ा ख़बरें
बाज़ार
सेंसेक्स 76,766 -70 (-0.09%)
निफ्टी 23,985 -11 (-0.05%)
मौसम
22°C
Light rain shower
💧 96% 💨 4 km/h
Dehradun