2027 तक भारत में 24 लाख ब्लू कॉलर नौकरियां बनेंगी, इस क्षेत्र में मिलेगा सबसे ज्यादा रोजगार
क्विक कॉमर्स’ के तेजी से बढ़ने के कारण कुशल और अर्ध-कुशल (ब्लू-कॉलर) श्रमिकों की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का अनुमान है। एक हालिया सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है। नौकरी से जुड़े प्लेटफॉर्म ‘इनडीड’ के अनुसार, भारत में 2027 तक 24 लाख नई नौकरियां उत्पन्न होने की संभावना है।
इनडीड इंडिया के बिक्री प्रमुख शशि कुमार ने बताया कि ‘क्विक कॉमर्स’ यानी तेजी से सामान की डिलीवरी करने वाली कंपनियों ने त्योहारी सीजन और ई-कॉमर्स की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पिछले तीन महीनों में 40,000 से अधिक कर्मचारियों को काम पर रखा है।
शशि कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत के दौरान कहा, “भारत में ‘क्विक कॉमर्स’ का क्षेत्र तेजी से प्रगति कर रहा है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ब्लू-कॉलर कर्मियों की नियुक्ति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे यह उद्योग विस्तार कर रहा है, कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों की जरूरत बढ़ रही है। इसके चलते भर्ती प्रक्रिया अधिक प्रतिस्पर्धात्मक हो गई है। कंपनियां अब ऐसे प्रतिभाशाली श्रमिकों की तलाश में हैं, जो तेजी से बदलते तकनीकी वातावरण में सहजता से काम कर सकें।
ब्लू-कॉलर नौकरियां क्या हैं?
‘ब्लू-कॉलर’ नौकरियों का तात्पर्य उन कार्यों से है, जिनमें शारीरिक श्रम या किसी विशेष कौशल की जरूरत होती है। इन नौकरियों के लिए औपचारिक शिक्षा से ज्यादा व्यावहारिक अनुभव और प्रशिक्षण महत्वपूर्ण होता है।
इनडीड के सर्वे के अनुसार, डिलीवरी ड्राइवर और खुदरा क्षेत्र के कर्मचारियों जैसे ब्लू-कॉलर पदों का औसत मासिक वेतन लगभग 22,600 रुपये है। सर्वे में यह भी पाया गया कि आने वाले वर्षों में भारत के विभिन्न उद्योगों को 24 लाख से अधिक ब्लू-कॉलर श्रमिकों की आवश्यकता होगी। इनमें से करीब 5 लाख नौकरियां केवल ‘क्विक कॉमर्स’ क्षेत्र में सृजित होने की उम्मीद है।