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7 दिन, दो त्रासदियां: मां के बाद प्लेन हादसे में पिता की भी मौत, अनाथ रह गईं दो मासूम बेटियां

7 दिन, दो त्रासदियां: मां के बाद प्लेन हादसे में पिता की भी मौत, अनाथ रह गईं दो मासूम बेटियां

अहमदाबाद विमान हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी, लेकिन अमरेली जिले के वाडिया गांव निवासी अर्जुनभाई मनुभाई पटोलिया की कहानी हर किसी को अंदर से झकझोर कर रख देती है। एक सप्ताह के भीतर इस परिवार पर ऐसी दोहरी त्रासदी टूटी कि दो मासूम बेटियों की दुनिया ही उजड़ गई। अर्जुनभाई, जो लंदन में अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ रहते थे, बीते दिनों अपनी पत्नी भारतीबेन के निधन के बाद भारत लौटे थे। भारतीबेन की अंतिम इच्छा थी कि उनकी अस्थियां उनके पैतृक गांव के तालाब और नदी में प्रवाहित की जाएं। अर्जुनभाई, आंखों में आंसू और दिल में ग़म लिए, इस इच्छा को पूरी करने भारत आए। गांव में विधिवत पूजा-पाठ और अस्थि विसर्जन के बाद वे गुरुवार, 12 जून को लंदन लौट रहे थे। उनकी बेटियां पिता का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह इंतजार कभी खत्म नहीं होगा। दोपहर 1:38 बजे एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरी, लेकिन दो मिनट बाद ही विमान हादसे का शिकार हो गया। केवल 625 फीट की ऊंचाई पर पहुंचते ही प्लेन का संतुलन बिगड़ गया और दोपहर 1:40 बजे जोरदार धमाके के साथ वह क्रैश हो गया। इस हादसे में अर्जुनभाई पटोलिया की भी मौत हो गई। पत्नी की अस्थियां विसर्जित कर लौट रहे अर्जुनभाई अब खुद इस दुनिया में नहीं रहे। अब सवाल यह है कि उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा, क्योंकि उनकी बेटियां लंदन में हैं और अब वे बिल्कुल अकेली रह गई हैं। इस हादसे ने सिर्फ एक जीवन नहीं छीना, बल्कि दो बच्चियों से उनका संपूर्ण परिवार छीन लिया। सात दिन पहले मां को खोने के बाद वे पिता के सहारे जीने की उम्मीद लगाए बैठी थीं। मगर नियति ने उन्हें अनाथ बना दिया। ये दो बहनें अब उस दर्द से गुजर रही हैं, जिसे शब्दों में बयां कर पाना असंभव है। एयर इंडिया की फ्लाइट में कुल 242 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें से केवल एक व्यक्ति जीवित बच पाया है। अब तक 265 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में भारतीयों के अलावा ब्रिटिश, पुर्तगाली और कनाडाई नागरिक भी शामिल हैं। यह हादसा न सिर्फ तकनीकी चूक का सवाल खड़ा करता है, बल्कि मानवता के सामने एक ऐसी पीड़ा लेकर आया है जिसे कोई भी भूल नहीं सकता। अर्जुनभाई पटोलिया की इस दर्दनाक कहानी ने पूरे देश को भावुक कर दिया है।

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