मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! यौन उत्पीड़न केस में हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी भगवंत सरकार कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) विधेयक-2026’ सहित कई जनहित के कार्यों को दी मंजूरी ‘क्या हमारी कीमत कीड़े-मकौड़ों से भी कम है?’ झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों का फूटा गुस्सा किसी का कान फटा, किसी का कंधा खिसका’—एअर इंडिया फ्लाइट के यात्रियों ने सुनाई दहला देने वाली आपबीती हवा में हड़कंप! टर्बुलेंस में फंसी एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट, कई यात्री घायल पटना में बनेगा PM मोदी का मंदिर, बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में बड़ा फैसला CM योगी का बड़ा लक्ष्य, इस बार 5 करोड़ घरों पर फहराएगा तिरंगा भगवा वेश में प्रदर्शन पड़ा भारी! राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को हाई कोर्ट का नोटिस SCO समिट के लिए पीएम मोदी को न्योता भेजने की तैयारी में पाकिस्तान, क्या इस्लामाबाद जाएंगे प्रधानमंत्री?

संन्यासी से सत्ता तक: योगी आदित्यनाथ का अनोखा सफर

संन्यासी से सत्ता तक: योगी आदित्यनाथ का अनोखा सफर

योगी आदित्यनाथ का जीवन एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े राज्य की सत्ता तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी है। 5 जून 1972 को पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचुर गांव में जन्मे योगी आदित्यनाथ का बचपन का नाम अजय सिंह बिष्ट था। पहाड़ी क्षेत्र में पले-बढ़े अजय सिंह ने शुरुआती शिक्षा स्थानीय स्कूलों से प्राप्त की और आगे चलकर गणित में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

शिक्षा के दौरान ही उनका झुकाव सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों की ओर बढ़ने लगा। इसी बीच वर्ष 1993 में उनका जीवन एक बड़ा मोड़ लेता है, जब वे गोरखपुर पहुंचे और महंत अवैद्यनाथ से उनकी मुलाकात हुई। इस मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें अपना शिष्य बनाया और 1994 में अजय सिंह बिष्ट ने संन्यास ग्रहण कर ‘योगी आदित्यनाथ’ के रूप में नई पहचान हासिल की। इसके बाद उन्होंने गोरखनाथ मठ की जिम्मेदारियां संभालीं।

धार्मिक जीवन के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ ने राजनीति में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। वर्ष 1998 में महज 26 वर्ष की उम्र में वे पहली बार गोरखपुर से सांसद चुने गए और देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने लगातार कई बार लोकसभा चुनाव जीते और क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत की। वर्ष 2002 में उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया, जिससे उनकी राजनीतिक सक्रियता और बढ़ी।

साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। 19 मार्च 2017 को उन्होंने लखनऊ में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और राज्य के 21वें मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 2022 में एक बार फिर जीत हासिल कर उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला।

मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और निवेश के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव किए। अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ‘बुलडोजर मॉडल’ के चलते उन्हें ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट और औद्योगिक विकास को नई गति मिली है।

एक छोटे से गांव से निकलकर महंत और फिर मुख्यमंत्री बनने तक का यह सफर केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के बल पर कोई भी व्यक्ति बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी निभा सकता है।

Share This
अगला लेख → रामनवमी पर यूपी में दो दिन की छुट्टी, CM योगी आदित्यनाथ का ब…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

बाज़ार
सेंसेक्स 78,499 -456 (-0.58%)
निफ्टी 24,571 -65 (-0.26%)
मौसम
29°C
Light rain shower
💧 73% 💨 7 km/h
Dehradun