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Narendra Modi ने दिया ‘MANAV’ विजन, AI को बताया भविष्य की दिशा

Narendra Modi ने दिया ‘MANAV’ विजन, AI को बताया भविष्य की दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्घाटन करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को लेकर एक व्यापक और मानवीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समावेशी और जिम्मेदार AI छोड़ना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस वैश्विक सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष, 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन और 500 से अधिक एआई लीडर्स ने भाग लिया।

समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम सहित कई वैश्विक नेता मौजूद रहे।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि AI मानव इतिहास में एक परिवर्तनकारी मोड़ साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत AI को “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की भावना से देखता है। उनका जोर इस बात पर रहा कि AI के युग में इंसान केवल डेटा प्वाइंट बनकर न रह जाए, बल्कि तकनीक को लोकतांत्रिक बनाते हुए उसे समावेशन और सशक्तिकरण का माध्यम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि AI भविष्य में क्या कर सकती है, बल्कि यह है कि हम वर्तमान में AI का उपयोग किस दिशा में करते हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और विशाल टेक टैलेंट पूल वाला देश है। युवा पीढ़ी जिस उत्साह से AI को अपना रही है, वह एक नए विश्वास का संकेत है। उन्होंने कहा कि मशीन लर्निंग से लेकर लर्निंग मशीन तक का सफर तेज, गहरा और व्यापक है, इसलिए हमें बड़ा विजन और उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के डिजिटल परिवर्तन की सराहना करते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे अभूतपूर्व हैं। उन्होंने डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम, डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ आईडी जैसी पहलों को वैश्विक उदाहरण बताया।

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा AI शिखर सम्मेलन बताया। उन्होंने कहा कि सरकार तकनीक को लोकतांत्रिक और सभी के लिए सुलभ बनाने के विजन पर काम कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत 38,000 GPUs स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और छात्रों को सुलभ दरों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं और इसमें 20,000 GPUs और जोड़े जाएंगे। उन्होंने जोर दिया कि AI के फायदों के साथ उसके संभावित खतरों को कम करने के लिए भी वैश्विक सहयोग जरूरी है।

कार्यक्रम में टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत AI को लेकर आशावादी सोच रखने वाला देश है और यहां का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर दुनिया के लिए मिसाल है। समिट के दौरान गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की।

यह सम्मेलन भारत की उस सोच को दर्शाता है जिसमें तकनीक को केवल नवाचार का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता की सेवा और भविष्य की सुरक्षा के साधन के रूप में देखा जा रहा है।

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