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SYL नहर मुद्दे पर चंडीगढ़ में बड़ी बैठक, मान–सैनी बोले—समाधान की कोशिश जारी

SYL नहर मुद्दे पर चंडीगढ़ में बड़ी बैठक, मान–सैनी बोले—समाधान की कोशिश जारी

चंडीगढ़ में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच लंबे समय से चले आ रहे सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद को लेकर अहम बैठक हुई। इस बैठक में दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। उद्देश्य दशकों पुराने जल विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ना था। बातचीत एक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, हालांकि किसी ठोस फैसले पर अभी सहमति नहीं बन सकी।

बैठक के बाद दोनों मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। नायब सिंह सैनी ने कहा कि बातचीत सकारात्मक और भाईचारे के वातावरण में हुई है। उन्होंने गुरुओं की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि “पवन गुरु, पानी पिता और धरती माता” जैसी सोच आज भी मार्गदर्शन देती है। उन्होंने भरोसा जताया कि जब बातचीत अच्छे माहौल में होती है तो उसका परिणाम भी सार्थक निकलता है। सैनी ने बताया कि आगे की प्रक्रिया में दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग के अधिकारी मिलकर बैठक करेंगे और उसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर समाधान की दिशा तय की जाएगी।

वहीं भगवंत मान ने भी बैठक को सकारात्मक बताया, लेकिन साफ किया कि फिलहाल पानी के बंटवारे पर कोई फैसला नहीं हो सका है उन्होंने कहा कि यह मुद्दा बहुत पुराना है और अब नई पीढ़ी इसे सुलझाने की कोशिश कर रही है। मान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पानी का मसला हल नहीं होता, तब तक नहर बनाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि नहर में पानी ही जाएगा, कोई जूस नहीं।

भगवंत मान ने यह भी कहा कि हरियाणा पंजाब का दुश्मन नहीं, बल्कि भाई राज्य है और पानी आज पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। ऐसे में केवल बंटवारे पर नहीं, बल्कि जल संरक्षण पर भी मिलकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों पक्ष किसी का हक मारे बिना एक न्यायसंगत समाधान निकालने के पक्ष में हैं।

इस बैठक में हरियाणा के जल संसाधन मंत्री बिरेंदर गोयल समेत दोनों राज्यों के अधिकारी शामिल रहे। तय किया गया कि जरूरत के अनुसार अधिकारी स्तर पर आगे भी बैठकें होंगी, ताकि इस लटके हुए विवाद को आपसी सहमति से सुलझाया जा सके।

गौरतलब है कि SYL नहर विवाद पंजाब और हरियाणा के बीच वर्षों से तनाव का कारण बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही दोनों राज्यों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के निर्देश दे चुका है। अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होनी है। SYL नहर परियोजना के तहत करीब 214 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है, जिसमें से 122 किलोमीटर पंजाब और 92 किलोमीटर हरियाणा में बनाया जाना था। इस नहर का उद्देश्य रावी और ब्यास नदियों के पानी का समान वितरण करना है, लेकिन पानी की उपलब्धता और हिस्सेदारी को लेकर विवाद अब तक बना हुआ है।

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