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UP BJP में बड़ा संगठनात्मक बदलाव तय, घट सकती है महामंत्रियों और उपाध्यक्षों की संख्या

UP BJP में बड़ा संगठनात्मक बदलाव तय, घट सकती है महामंत्रियों और उपाध्यक्षों की संख्या

लखनऊ। आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठन को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति के तहत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उत्तर प्रदेश इकाई में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी कर रही है। पार्टी के भीतर प्रदेश संगठन के आकार, पदाधिकारियों की संख्या और उनके दायित्वों में फेरबदल को लेकर मंथन तेज हो गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही प्रदेश संगठन की नई संरचना सामने आ सकती है, जिसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।

सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व प्रदेश संगठन को अधिक चुस्त और परिणामोन्मुख बनाने पर विचार कर रहा है। इसी क्रम में प्रदेश महामंत्रियों की संख्या को सात से घटाकर छह किए जाने की संभावना है। इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्षों और मंत्रियों की संख्या में भी बदलाव किया जा सकता है। पार्टी का मानना है कि सीमित लेकिन अधिक प्रभावी टीम संगठनात्मक कार्यों को बेहतर ढंग से आगे बढ़ा सकती है।

पार्टी के अंदर इस बात पर भी चर्चा हुई है कि प्रदेश इकाई में वर्तमान 18 उपाध्यक्षों की संख्या को कम कर 14 किया जाए। हालांकि उत्तर प्रदेश के विशाल भौगोलिक क्षेत्र और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए संगठन का आकार अपेक्षाकृत बड़ा रखने की भी मांग सामने आई है। पार्टी के कई नेताओं का तर्क है कि प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व देना आवश्यक है।

अब तक की व्यवस्था में सात प्रदेश महामंत्रियों में से छह को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी जाती थी, जबकि एक महामंत्री कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्य करता था। हालांकि पिछली कार्यकारिणी में इस व्यवस्था में बदलाव किया गया था। गोविंद नारायण शुक्ला को कार्यालय प्रभारी की जिम्मेदारी के साथ-साथ गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी भी बनाया गया था। अब नई संरचना में जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण पर विचार किया जा रहा है।

संगठनात्मक बदलावों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के राजनीतिक महत्व को भी ध्यान में रखा जा रहा है। राजधानी लखनऊ अवध क्षेत्र का हिस्सा है और परंपरागत रूप से यहां से बड़ी संख्या में प्रदेश पदाधिकारी बनाए जाते रहे हैं। वहीं काशी क्षेत्र, जहां से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा सदस्य हैं, संगठन के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी तरह मुख्यमंत्री और प्रदेश नेतृत्व से जुड़े होने के कारण गोरखपुर क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाजपा सूत्रों के अनुसार, कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पिछले कुछ समय के दौरान संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए थे। ऐसे में इस क्षेत्र में नए चेहरों को अवसर दिए जाने की संभावना अधिक मानी जा रही है। दूसरी ओर ब्रज क्षेत्र से सरकार में पहले से ही बड़ी संख्या में मंत्री शामिल हैं, इसलिए वहां संगठन में बड़े बदलाव की संभावना अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर भी संगठन विशेष रणनीति पर काम कर रहा है। चर्चा है कि पश्चिम क्षेत्र से उपाध्यक्षों की संख्या कम करते हुए वहां से कम से कम एक महामंत्री नियुक्त किया जा सकता है, ताकि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखा जा सके और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व मजबूत हो।

पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि हाल ही में जिलों के आकार और आवश्यकताओं की परवाह किए बिना अध्यक्ष समेत 21-21 सदस्यीय टीमें गठित की गई थीं। ऐसे में प्रदेश स्तर पर संगठन की संरचना में बदलाव कर पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच एक मजबूत संदेश देने की तैयारी है।

हालांकि राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश इकाई को अपेक्षाकृत छोटा रखने का विकल्प सुझाया था, लेकिन प्रदेश के नेताओं ने चुनावी परिस्थितियों और राज्य के विशाल आकार का हवाला देते हुए संगठन को पर्याप्त विस्तार देने का पक्ष रखा। फिलहाल संकेत हैं कि सात की जगह छह महामंत्री बनाए जाएंगे, जबकि 18 उपाध्यक्षों और 16 मंत्रियों की संख्या में भी आवश्यकतानुसार संशोधन किया जा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का यह संगठनात्मक पुनर्गठन आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व संगठन को अधिक सक्रिय, संतुलित और क्षेत्रीय स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए नए समीकरण तैयार कर रहा है, जिससे चुनावी रणनीति को और मजबूती मिल सके।

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