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UP Defence Corridor: लखनऊ बनेगा मिसाइल हब, कानपुर से चित्रकूट तक तैयार होंगे रक्षा क्लस्टर

UP Defence Corridor: लखनऊ बनेगा मिसाइल हब, कानपुर से चित्रकूट तक तैयार होंगे रक्षा क्लस्टर

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) तेजी से देश के सबसे बड़े रक्षा विनिर्माण केंद्रों में अपनी पहचान बना रहा है। क्लस्टर आधारित रणनीति के तहत लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट को उनकी औद्योगिक क्षमता के अनुरूप अलग-अलग रक्षा उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य रक्षा उपकरणों के डिजाइन, परीक्षण, निर्माण, इंटीग्रेशन और निर्यात तक की पूरी वैल्यू चेन को उत्तर प्रदेश में स्थापित करना है, जिससे देश के आत्मनिर्भर रक्षा अभियान को नई गति मिलेगी।

कानपुर को लघु शस्त्र, गोला-बारूद, बैलिस्टिक सुरक्षा प्रणाली और रक्षा वस्त्रों का प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है। यहां अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज ने अपनी एकीकृत गोला-बारूद निर्माण इकाई शुरू कर दी है, जबकि अधुनिक मैटेरियल एंड साइंसेज और ए.आर. पॉलिमर्स रक्षा वस्त्र एवं बैलिस्टिक सुरक्षा सामग्री का उत्पादन कर रहे हैं। इसके अलावा डेल्टा कॉम्बैट सिस्टम्स भी हथियार और गोला-बारूद निर्माण इकाई स्थापित कर रही है। इन परियोजनाओं से घरेलू जरूरतों के साथ-साथ रक्षा निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कानपुर के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए आईआईटी कानपुर में डिफेंस टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम (DTIS) के तहत अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स टेस्टिंग फाउंडेशन (UASTF) और कम्युनिकेशन डिफेंस टेस्टिंग फाउंडेशन (CDTF) की स्थापना प्रस्तावित है। इन सुविधाओं से ड्रोन, संचार प्रणालियों और अन्य स्वदेशी रक्षा तकनीकों के परीक्षण एवं प्रमाणीकरण को आधुनिक आधार मिलेगा।

लखनऊ को मिसाइल, एयरोस्पेस और उन्नत रक्षा प्रणालियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां ब्रह्मोस एयरोस्पेस की अत्याधुनिक इकाई अगली पीढ़ी की मिसाइल प्रणालियों का निर्माण कर रही है। वहीं एरोलॉय टेक्नोलॉजीज एयरोस्पेस ग्रेड टाइटेनियम कास्टिंग और संकल्प सेफ्टी सॉल्यूशंस तकनीकी सुरक्षा उत्पादों का उत्पादन कर रही है। इसके अलावा जयके एंटरप्राइजेज मिसाइल लॉन्च ट्यूब और मिसाइल कंटेनर निर्माण की इकाई स्थापित कर रही है। SIAL Manufacturers, KAWA UAV, Tankup Engineers तथा IRDE-DRDO सहित कई संस्थानों की परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं। प्रस्तावित एडवांस्ड मैटेरियल्स डिफेंस टेस्टिंग फाउंडेशन (AMDTF) से रक्षा और एयरोस्पेस उद्योगों को अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

अलीगढ़ को ड्रोन, काउंटर-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और प्रिसिजन इंजीनियरिंग के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां Werywin Defence, Nitya Creations, Shridha Udyog, New Space Research & Technologies, Amitec Electronics, Sidak Technologies और अन्य कंपनियां ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों के विकास पर काम कर रही हैं। इससे अलीगढ़ आधुनिक रक्षा तकनीकों का महत्वपूर्ण हब बनता जा रहा है।

झांसी रक्षा कॉरिडोर का सबसे बड़ा विस्फोटक, गोला-बारूद और भारी रक्षा विनिर्माण क्लस्टर बनकर उभर रहा है। यहां भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) की मिसाइल प्रोपल्शन सिस्टम निर्माण इकाई स्थापित है। इसके अलावा Goodluck Astra India, Navbharat Defence Systems, Micron Instruments, NextStrat TechVision, WB Electronics, Lorenco Defence और Gurutvaa Systems जैसी कंपनियां विस्फोटक, यूएवी, लॉयटरिंग म्यूनिशन और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े बड़े निवेश कर रही हैं। इन परियोजनाओं से झांसी देश के रणनीतिक रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है।

वहीं चित्रकूट को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम इंटीग्रेशन के विशेष केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) करीब 562.50 करोड़ रुपये के निवेश से अत्याधुनिक इंटीग्रेशन एवं टेस्टिंग सुविधा स्थापित कर रही है। इस परियोजना के माध्यम से रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, संचार उपकरण, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के विकास को गति मिलेगी।

क्लस्टर आधारित इस मॉडल के तहत कानपुर को लघु शस्त्र और गोला-बारूद, लखनऊ को मिसाइल एवं एयरोस्पेस, अलीगढ़ को ड्रोन एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक, झांसी को विस्फोटक एवं भारी रक्षा विनिर्माण और चित्रकूट को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सिस्टम इंटीग्रेशन का उत्कृष्टता केंद्र बनाया जा रहा है। प्रस्तावित परीक्षण अवसंरचना और औद्योगिक निवेशों के साथ उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर न केवल स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूती देगा, बल्कि रोजगार, निवेश और रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी राज्य को देश के अग्रणी रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

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