UP SIR प्रक्रिया में बड़ा खुलासा: 2.75 करोड़ वोटर्स के फॉर्म गायब, CM योगी ने नेताओं को दी कड़ी चेतावनी
उत्तर प्रदेश में चल रही SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। चुनाव आयोग की ओर से जारी अपडेट के मुताबिक, राज्य में करीब 2 करोड़ 75 लाख मतदाताओं के गणना फॉर्म अब तक वापस नहीं आए हैं। BLO द्वारा फॉर्म जमा न होने की इतनी बड़ी संख्या ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस स्थिति को देखते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने SIR प्रक्रिया की समयसीमा को और बढ़ाने के संकेत दिए हैं। पहले ही यह अवधि 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी गई थी।
इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी शक्ति के साथ इस अभियान को तेज कर दिया है। एक तरफ प्रदेश में अवैध घुसपैठियों और संदिग्ध लोगों पर प्रशासनिक कार्रवाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ सीएम योगी अपने जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने सभी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि “किसी भी पात्र मतदाता का नाम छूटना नहीं चाहिए।” मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग गणना फॉर्म नहीं भर रहे हैं, तो इसके कई कारण हो सकते हैं—जैसे बड़े पैमाने पर पलायन, मृत्यु, या फिर संदिग्ध अप्रवासियों की उपस्थिति।
मुख्यमंत्री ने खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में संदिग्ध अप्रवासियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। इसीलिए उन्होंने भाजपा के सभी विधायक, सांसद, एमएलसी और संगठन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने अन्य कार्यों को फिलहाल छोड़कर सिर्फ SIR प्रक्रिया पर ध्यान दें और जिनके फॉर्म अभी जमा नहीं हुए हैं, उन्हें जल्द से जल्द एकत्र करें।
इस पूरे मुद्दे के बीच सीएम योगी का एक बयान विशेष रूप से चर्चा में है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का नेतृत्व, कार्यकर्ता और उनका वोटर समूह BJP से कहीं ज्यादा जागरूक है। उनका तर्क था कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में लगभग 100% गणना फॉर्म जमा हो चुके हैं। वहां के लोग BLO को अपने प्रपत्र कैंप लगाकर सौंप चुके हैं। जबकि इसके मुकाबले कई BJP नेता और कार्यकर्ता ढिलाई बरत रहे हैं।
सीएम योगी ने सख्त लहज़े में कहा कि “अगर किसी के घर शादी भी है, तो भी परिवार का एक सदस्य SIR प्रक्रिया में सक्रिय रहे।” मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और जनसंपर्क का सबसे अहम काम है, जिसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।