योगी सरकार की नई ट्रांसफर पॉलिसी, 3 साल जिले और 7 साल मंडल में तैनाती की सीमा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में राज्य कर्मचारियों के लिए नई तबादला नीति को मंजूरी दिए जाने की संभावना है। प्रस्तावित नीति के लागू होने के बाद प्रदेश के करीब आठ लाख सरकारी कर्मचारियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और कर्मचारियों की तैनाती को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
प्रस्तावित तबादला नीति के अनुसार किसी भी कर्मचारी को एक ही जिले में तीन वर्ष से अधिक तथा एक ही मंडल में सात वर्ष से अधिक समय तक तैनात नहीं रखा जाएगा। निर्धारित अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को तबादले की प्रक्रिया के दायरे में लाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में संतुलन आएगा और विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
नई नीति में सरकारी सेवा में कार्यरत दंपत्ति कर्मचारियों को भी राहत देने का प्रस्ताव है। यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी हैं, तो उन्हें एक ही स्थान या आसपास के क्षेत्र में तैनाती देने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे पारिवारिक जीवन और कार्यस्थल के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा दिव्यांग कर्मचारियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मियों को तबादले के मामलों में विशेष छूट और राहत दिए जाने का भी प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। सरकार ऐसे कर्मचारियों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की तैयारी कर रही है।
राज्य सरकार आकांक्षी जिलों में कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दे रही है। प्रस्ताव के तहत इन जिलों में किसी भी महत्वपूर्ण पद को रिक्त न रखने की व्यवस्था जारी रखने का निर्णय लिया जा सकता है, ताकि विकास और जनसेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित न हों।
कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि राज्य कर्मचारियों को दो प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई भत्ता देने का प्रस्ताव रखा जाएगा। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो संशोधित दरें जनवरी से प्रभावी हो सकती हैं, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
बैठक में बुनियादी ढांचे और निर्माण कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा। विशेष रूप से सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले तारकोल (बिटुमेन) की बढ़ी हुई कीमतों को देखते हुए पुराने टेंडरों में लागत अंतर की भरपाई के संबंध में निर्णय लिया जा सकता है। सरकार सड़क परियोजनाओं की गति बनाए रखने और निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आने देने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर विचार कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, इस कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों से जुड़े लंबे समय से लंबित कई मुद्दों पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। सरकार का फोकस कर्मचारी हितों की रक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और विकास कार्यों में तेजी लाने पर है। माना जा रहा है कि तबादला नीति, महंगाई भत्ता वृद्धि और निर्माण कार्यों से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
अब सभी की नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली इस कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई है, क्योंकि इसके फैसलों का सीधा असर लाखों सरकारी कर्मचारियों और राज्य की विकास योजनाओं पर पड़ सकता है।