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कोर्ट में आतंकी तहव्वुर राणा को चुनौती देने वाला कौन है? निर्भया व डेविड हेडली केस से भी जुड़ा है ये नाम

कोर्ट में आतंकी तहव्वुर राणा को चुनौती देने वाला कौन है? निर्भया व डेविड हेडली केस से भी जुड़ा है ये नाम

मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा को अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हिरासत में सौंप दिया गया है। राणा के खिलाफ मुकदमे की अगुवाई वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन करेंगे, जो एनआईए की ओर से कोर्ट में अभियोजन पक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं। दयान कृष्णन वही वकील हैं जिन्होंने 26/11 के एक अन्य साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली के प्रत्यर्पण मामले में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब वे राणा के खिलाफ एक मजबूत कानूनी रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं।

प्रत्यर्पण प्रक्रिया में रही अहम भूमिका
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस केस में दयान कृष्णन को अनुभवी आपराधिक वकील और विशेष अभियोजक नरेंद्र मान का भी सहयोग मिलेगा। नरेंद्र मान पहले भी सीबीआई की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में कई अहम मामलों की पैरवी कर चुके हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि राणा के प्रत्यर्पण मामले में कृष्णन ने शुरुआती दौर से ही एनआईए के साथ मिलकर काम किया। अमेरिकी अदालतों के समक्ष उन्होंने ठोस सबूत पेश किए, जिससे राणा की तमाम अपीलें खारिज हो गईं।

अमेरिका में पेश किए मजबूत सुबूत
2019-20 में प्रत्यर्पण प्रक्रिया की शुरुआत से ही कृष्णन एनआईए से जुड़े हुए थे। इस सिलसिले में उन्होंने अमेरिका का दौरा भी किया और वहां की अदालतों में भारत की ओर से केस प्रस्तुत किया। एनआईए अधिकारियों के अनुसार, तहव्वुर राणा की आपराधिक गतिविधियों की पड़ताल और उसके खिलाफ सबूत जुटाने में कृष्णन की अहम भूमिका रही। कोर्ट में यह साबित किया गया कि भारत द्वारा लगाए गए आरोप अमेरिका में दर्ज मामलों से अलग हैं।

हाई-प्रोफाइल मामलों में विशेषज्ञता
दयान कृष्णन को संवेदनशील और जटिल मामलों को संभालने में विशेषज्ञ माना जाता है। 2012 के निर्भया कांड में उन्होंने दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष सरकारी वकील के रूप में मुकदमा लड़ा। इस दौरान उन्होंने कहा था कि उन्होंने ये जिम्मेदारी समाज के प्रति अपने कर्तव्य के रूप में निभाई, न कि किसी आर्थिक लाभ के लिए।

तीन दशकों का अनुभव
नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (बेंगलुरु) से पढ़ाई करने वाले कृष्णन को करीब 30 वर्षों का कानूनी अनुभव है। उन्होंने संसद हमले केस, कावेरी जल विवाद, दूरसंचार घोटाला, नीतीश कटारा मर्डर केस, उपहार सिनेमा हादसा और गोवा बाल शोषण जैसे कई बड़े मामलों में काम किया है। वहीं उनके सहयोगी नरेंद्र मान को भी तीन दशकों से अधिक का कानूनी अनुभव है और वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं।

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