खराब कॉर्निया वाले नेत्रहीन भी देख सकेंगे, डॉक्टरों ने निकाला कमाल का बायोइंजीनियर्ड फॉर्मूला l
आंखों की समस्या और नेत्रहीनता से ग्रस्त कई लोगों के लिए राहतभरी खबर आई है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने खराब कॉर्निया का इलाज करने के लिए एक नई बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया तकनीक विकसित की है, जो उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जिनका पारंपरिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट संभव नहीं होता।
AIIMS और IIT दिल्ली की टीम ने इस पर काम कर लंबे परीक्षण के बाद इस नई तकनीक का क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है। इस बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया का एक खास लाभ यह है कि यह उन डोनेशन कॉर्नियाज से बनाया गया है, जिनमें जीवित कोशिकाएं नहीं रहतीं या जो संक्रमण से ग्रस्त होते हैं। इन कॉर्नियाज को अब तक उपयोगी नहीं माना जाता था, लेकिन अब इन्हें इस तकनीक से उपयोगी बनाया जा सकेगा।
यह कॉर्निया प्राकृतिक कॉर्निया के साथ धीरे-धीरे शरीर की अपनी कोशिकाओं से जुड़ जाता है और आंखों में एक नई पारदर्शी सतह बनाता है। खासतौर पर उन मरीजों के लिए यह तकनीक मददगार है जिनके कॉर्निया का एक हिस्सा डैमेज हो चुका है या संक्रमण के कारण पूरा कॉर्निया बदलने में जोखिम होता है। इससे छोटे पैच की मदद से भी रोगी की रोशनी बचाई जा सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि इससे न केवल दान की गई आंखों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि मरीजों को कम खर्च और कम जोखिम वाली सर्जरी का विकल्प मिलेगा। इसके साथ ही, यह तकनीक नेत्रहीनता को कम करने में एक बड़ा कदम साबित होगी, खासकर उन गरीब और ग्रामीण इलाकों में जहां नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा सीमित है।
यह नया फॉर्मूला जटिल मामलों में भी सफल सर्जरी को संभव बनाएगा, जिससे हजारों लोगों की आंखों की रोशनी लौट सकेगी। यह शोध नेत्रदान में कमी और पारंपरिक ट्रांसप्लांट के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।