मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
फार्मेसी परीक्षा पर विवाद के बीच CM मान का बड़ा बयान, बोले- पेपर लीक नहीं, नकल की कोशिश हुई थी लोकसभा में पप्पू यादव का NTA पर बड़ा हमला, बोले- पेपर लीक की जड़ तक पहुंचे सरकार, चेयरमैन पर क्यों है इतनी मेहरबानी? भगवंत मान सरकार प्रदेश में स्वास्थ संबंधी समस्याओं को लेकर सजग छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे मौन व्रत पर, आंदोलन को मिला बड़ा साथ जंतर-मंतर पर अफरा-तफरी, छात्रों और निहंगों के बीच धक्का-मुक्की से बढ़ा तनाव PM मोदी के ऐलान पर राहुल गांधी का पलटवार, रखीं 3 बड़ी मांगें CJP Protest: दिल्ली में बवाल, 16 मेट्रो स्टेशन बंद; सरकार से बातचीत को तैयार CJP पंजाब में बनाए जाएंगे 10 लाख नए राशन कार्ड 22 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन :मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान PM मोदी का राहुल गांधी पर तंज: मैं 56 साल के युवा की बात नहीं, 28 साल के युवाओं की बात कर रहा हूं सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल शिफ्ट करने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई

खराब कॉर्निया वाले नेत्रहीन भी देख सकेंगे, डॉक्टरों ने निकाला कमाल का बायोइंजीनियर्ड फॉर्मूला l

खराब कॉर्निया वाले नेत्रहीन भी देख सकेंगे, डॉक्टरों ने निकाला कमाल का बायोइंजीनियर्ड फॉर्मूला l

आंखों की समस्या और नेत्रहीनता से ग्रस्त कई लोगों के लिए राहतभरी खबर आई है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने खराब कॉर्निया का इलाज करने के लिए एक नई बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया तकनीक विकसित की है, जो उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगी जिनका पारंपरिक कॉर्निया ट्रांसप्लांट संभव नहीं होता।

AIIMS और IIT दिल्ली की टीम ने इस पर काम कर लंबे परीक्षण के बाद इस नई तकनीक का क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है। इस बायोइंजीनियर्ड कॉर्निया का एक खास लाभ यह है कि यह उन डोनेशन कॉर्नियाज से बनाया गया है, जिनमें जीवित कोशिकाएं नहीं रहतीं या जो संक्रमण से ग्रस्त होते हैं। इन कॉर्नियाज को अब तक उपयोगी नहीं माना जाता था, लेकिन अब इन्हें इस तकनीक से उपयोगी बनाया जा सकेगा।

यह कॉर्निया प्राकृतिक कॉर्निया के साथ धीरे-धीरे शरीर की अपनी कोशिकाओं से जुड़ जाता है और आंखों में एक नई पारदर्शी सतह बनाता है। खासतौर पर उन मरीजों के लिए यह तकनीक मददगार है जिनके कॉर्निया का एक हिस्सा डैमेज हो चुका है या संक्रमण के कारण पूरा कॉर्निया बदलने में जोखिम होता है। इससे छोटे पैच की मदद से भी रोगी की रोशनी बचाई जा सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि इससे न केवल दान की गई आंखों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि मरीजों को कम खर्च और कम जोखिम वाली सर्जरी का विकल्प मिलेगा। इसके साथ ही, यह तकनीक नेत्रहीनता को कम करने में एक बड़ा कदम साबित होगी, खासकर उन गरीब और ग्रामीण इलाकों में जहां नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा सीमित है।

यह नया फॉर्मूला जटिल मामलों में भी सफल सर्जरी को संभव बनाएगा, जिससे हजारों लोगों की आंखों की रोशनी लौट सकेगी। यह शोध नेत्रदान में कमी और पारंपरिक ट्रांसप्लांट के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

Share This
अगला लेख → नासिक के कपालेश्वर महादेव मंदिर में क्यों नहीं है नंदी? जाने…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताज़ा ख़बरें
बाज़ार
सेंसेक्स 77,655 +889 (+1.16%)
निफ्टी 24,250 +265 (+1.1%)
मौसम
22°C
Partly Cloudy
💧 89% 💨 5 km/h
Dehradun