चुनाव से पहले UP में सियासी हलचल: फर्जी वोटर कैंपेन, कफ सिरप कांड और संसद में अखिलेश की रणनीति
सियासत में बढ़ती गर्माहट के बीच उत्तर प्रदेश की तीन बड़ी खबरें सुर्खियों में हैं—सीएम योगी आदित्यनाथ का फर्जी वोटरों पर बड़ा अभियान, डीजीपी का कफ सिरप सिंडिकेट पर खुलासा, और संसद में अखिलेश यादव का राजनीतिक वार, जिसमें उन्होंने अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को खड़ा कर बीजेपी को सीधे निशाने पर लिया।
चुनावी तैयारी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी तरह मिशन मोड में हैं। SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को उन्होंने शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों—खासकर मुजफ्फरनगर और अलीगढ़—में उन्होंने कई दौरों में ज़मीनी रिपोर्ट लेकर फर्जी वोटरों की पहचान पर जोर दिया है। योगी लगातार सांसदों, विधायकों और एमएलसी के साथ बंद कमरे की मीटिंग कर यह निर्देश दे रहे हैं कि एक भी पात्र मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए, जबकि कोई गलत या संदिग्ध नाम वोटर लिस्ट में शामिल न हो। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संकेत दिया है कि SIR की समयसीमा को बढ़ाया भी जा सकता है।
योगी सरकार दो मुख्य रणनीतियों पर काम कर रही है—पहली, डुप्लीकेट और फर्जी वोटरों की पहचान, और दूसरी, अवैध घुसपैठियों के प्रभाव को खत्म करना। इसके लिए 17 ऐसे नगर निकायों में विशेष अभियान चल रहा है, जहां सफाईकर्मियों की नियुक्तियों में अनियमितताओं की आशंका है। मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद बीजेपी के वे कार्यकर्ता भी सक्रिय हो गए हैं, जो पहले इस प्रक्रिया को लेकर उदासीन थे।
इसी बीच उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने बड़ा खुलासा किया है कि जहरीले कफ सिरप का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क यूपी से निकलकर नेपाल और बांग्लादेश तक फैला है। उन्होंने माना कि इस सिंडिकेट में कई सफेदपोश तत्व शामिल हैं, जो इसे संरक्षण देने में भूमिका निभा रहे हैं। राज्य पुलिस इस नेटवर्क की गहन जांच कर रही है, और कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
संसद में राजनीतिक तापमान तब और बढ़ गया जब अखिलेश यादव ने ‘वंदे मातरम’ पर चल रही चर्चा के दौरान अचानक अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद को खड़ा कर दिया। बीजेपी की ओर से टिप्पणियाँ आने लगीं, जिसके जवाब में अखिलेश ने इस कदम को एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश बताया। यह सपा का वह ‘ब्रहमास्त्र’ था, जिसने बीजेपी को आक्रामक प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर दिया।
अखिलेश का यह कदम इसलिए भी अहम माना गया क्योंकि अयोध्या से पहली बार सपा को जीत दिलाने वाले अवधेश प्रसाद बीजेपी की चुनावी रणनीति का बड़ा चुनौती बिंदु बन चुके हैं। संसद में उनका नाम लेकर अखिलेश ने यही संदेश दिया कि बीजेपी चाहे जितनी आपत्तियाँ उठाए, वह अयोध्या की राजनीतिक तस्वीर बदल चुके दलित नेता को छिपने नहीं देगी।
इन तीनों घटनाओं से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी संग्राम का शोर अभी से तेज हो चुका है—एक तरफ वोटर लिस्ट की लड़ाई, दूसरी तरफ माफिया नेटवर्क पर सख्ती, और तीसरी तरफ संसद में तीखी राजनीतिक नोकझोंक, जो आने वाले समय की बड़ी राजनीतिक हलचल का संकेत दे रही है।