मुख्य सामग्री पर जाएं
ब्रेकिंग न्यूज़
भगवंत मान सरकार प्रदेश में स्वास्थ संबंधी समस्याओं को लेकर सजग छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे मौन व्रत पर, आंदोलन को मिला बड़ा साथ जंतर-मंतर पर अफरा-तफरी, छात्रों और निहंगों के बीच धक्का-मुक्की से बढ़ा तनाव PM मोदी के ऐलान पर राहुल गांधी का पलटवार, रखीं 3 बड़ी मांगें CJP Protest: दिल्ली में बवाल, 16 मेट्रो स्टेशन बंद; सरकार से बातचीत को तैयार CJP पंजाब में बनाए जाएंगे 10 लाख नए राशन कार्ड 22 जुलाई से शुरू होंगे आवेदन :मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान PM मोदी का राहुल गांधी पर तंज: मैं 56 साल के युवा की बात नहीं, 28 साल के युवाओं की बात कर रहा हूं सोनम वांगचुक को दूसरे अस्पताल शिफ्ट करने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई जंतर-मंतर से अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया, संसद मार्च के बीच बड़ी कार्रवाई CJP प्रवक्ता सरकार से मिलने पहुंचे, संसद मार्च पर बढ़ी सियासी हलचल

दुनिया के हर इंसान पर 11 लाख का कर्ज, इससे मुक्ति कब मिलेगी ?

दुनिया के हर इंसान पर 11 लाख का कर्ज, इससे मुक्ति कब मिलेगी ?

दुनिया में आज हर व्यक्ति पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, और यह स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अगर दुनिया के कुल कर्ज को उसकी पूरी आबादी में बांट दिया जाए, तो हर व्यक्ति पर लगभग 11 लाख रुपये का कर्ज होगा। यह सुनने में मजाक जैसा लगता है, लेकिन यह पूरी तरह से सच है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया पर कुल कर्ज 102 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 8,67,53,95,80,00,00,001 रुपये) तक पहुंच चुका है, जबकि दुनिया की कुल आबादी करीब 8.2 बिलियन है।

दुनिया का सबसे बड़ा कर्ज अमेरिका पर है, और इसके बाद चीन, जापान और यूरोपीय देश भी इस कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं। भारत इस सूची में सातवें स्थान पर है, जहां पर 3 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है। हालांकि भारत की जीडीपी इस कर्ज से थोड़ी कम है, लेकिन एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए यह कर्ज एक गंभीर चिंता का विषय है।

आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक दुनिया में कर्ज की स्थिति और भी विकट हो गई है। अमेरिका और चीन जैसे देशों पर कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। दुनिया का कुल कर्ज 102 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जबकि वैश्विक जीडीपी 110 ट्रिलियन डॉलर के करीब है, यानी कि कर्ज और जीडीपी का अनुपात 93 फीसदी तक पहुंच चुका है, जो कि एक खतरनाक संकेत है। कई देश ऐसे हैं जिनका कर्ज उनकी कुल जीडीपी से भी अधिक हो चुका है और कुछ देशों का तो कर्ज डिफॉल्ट के कगार पर पहुंच चुका है।

अगर हम इस कर्ज को दुनिया की आबादी में बराबर बांटें, तो हर एक व्यक्ति पर औसतन 11 लाख रुपये का कर्ज आएगा। यह आंकड़ा इस बात को भी उजागर करता है कि कई देशों में तो किसी एक व्यक्ति की पूरी जिंदगी की कमाई भी इतना नहीं होती, और ऐसे में 11 लाख रुपये का कर्ज एक गंभीर चुनौती बनकर उभरता है।

भारत की स्थिति पर नजर डालें तो, भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसका कुल कर्ज 3.057 ट्रिलियन डॉलर है। जबकि भारत की जीडीपी 3.7 ट्रिलियन डॉलर है, इस प्रकार भारत का कर्ज अपनी जीडीपी से कम है, लेकिन एक उभरती अर्थव्यवस्था के लिए यह कर्ज चिंताजनक है। भारत का कर्ज वैश्विक कर्ज का 3.2 प्रतिशत है।

दूसरी ओर, कुछ देशों पर कर्ज बहुत कम है, जैसे इराक, चिली, वियतनाम, बांग्लादेश, यूक्रेन और नॉर्वे, जिनका वैश्विक कर्ज में योगदान बहुत कम है। पाकिस्तान पर भी कर्ज का दबाव है, लेकिन उसकी हिस्सेदारी केवल 0.3 प्रतिशत है।

Share This
अगला लेख → विनोद कांबली की अचानक तबियत हुई खराब , तुरंत अस्पताल में किय…

टिप्पणी करें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताज़ा ख़बरें
बाज़ार
सेंसेक्स 77,645 +879 (+1.15%)
निफ्टी 24,246 +261 (+1.09%)
मौसम
28°C
Light rain shower
💧 80% 💨 6 km/h
Dehradun