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पंजाब निकाय चुनाव में AAP की प्रचंड जीत, कांग्रेस से जुड़ा दिलचस्प कनेक्शन

पंजाब निकाय चुनाव में AAP की प्रचंड जीत, कांग्रेस से जुड़ा दिलचस्प कनेक्शन

पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ का संकेत दिया है। चुनाव परिणामों ने न सिर्फ AAP की बढ़ती ताकत को दिखाया है, बल्कि कई ऐसे राजनीतिक आंकड़े भी सामने आए हैं जिनका सीधा संबंध राज्य की पूर्व सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस से जुड़ता है। दिलचस्प बात यह है कि जिस तरह वर्ष 2021 में कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए स्थानीय निकाय चुनावों में एकतरफा जीत हासिल की थी, लगभग वैसा ही प्रदर्शन अब 2026 में आम आदमी पार्टी ने किया है।

पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने एक बार फिर उस राजनीतिक परंपरा को मजबूत किया है, जिसमें सत्ता में मौजूद पार्टी को स्थानीय स्तर के चुनावों में बड़ा फायदा मिलता है। वर्ष 2021 में कांग्रेस सरकार के दौरान हुए निकाय चुनावों में कांग्रेस ने 2,215 वार्डों में से 1,432 सीटों पर जीत दर्ज कर राज्य के अधिकांश नगर निगमों और नगर परिषदों पर कब्जा जमा लिया था। उस समय कांग्रेस राज्य की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी थी।

अब 2026 के निकाय चुनावों में यही तस्वीर आम आदमी पार्टी के पक्ष में दिखाई दी है। राज्य के कुल 1,977 वार्डों में हुए चुनाव में AAP ने 958 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है। वहीं कांग्रेस 397 वार्डों तक सीमित रह गई। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल को 192, भारतीय जनता पार्टी को 172, निर्दलीय उम्मीदवारों को 251 और बहुजन समाज पार्टी को 7 वार्डों में जीत मिली है।

नगर निगम चुनावों में भी आम आदमी पार्टी का दबदबा साफ दिखाई दिया। राज्य के 8 नगर निगमों में से 5 पर AAP ने जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस और बीजेपी को एक-एक नगर निगम में सफलता मिली। एक नगर निगम में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। पठानकोट नगर निगम में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई।

नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में भी आम आदमी पार्टी ने बढ़त बनाए रखी। 75 नगर परिषदों में से 40 पर AAP ने कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस को 18, शिरोमणि अकाली दल को 10 और बीजेपी को 4 परिषदों में सफलता मिली। वहीं 20 नगर पंचायतों में AAP ने 11, कांग्रेस ने 5, अकाली दल ने 2 और बीजेपी ने 1 पंचायत में जीत दर्ज की।

इन नतीजों का एक और दिलचस्प पहलू यह रहा कि कई बड़े राजनीतिक चेहरे अपने ही गढ़ में पार्टी को जीत दिलाने में सफल नहीं हो सके। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के पारंपरिक क्षेत्र गिद्दड़बाहा में आम आदमी पार्टी ने 19 में से 17 वार्ड जीतकर कांग्रेस को बड़ा झटका दिया। इसी तरह मोहाली नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के बेटे कंवरबीर सिंह सिद्धू को वार्ड नंबर 10 से हार का सामना करना पड़ा।

वहीं बादल परिवार के प्रभाव वाले क्षेत्र बठिंडा नगर निगम में भी आम आदमी पार्टी ने 31 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया और शिरोमणि अकाली दल को कड़ी चुनौती दी। हालांकि अकाली दल को रामपुरा फूल नगर परिषद में कुछ राहत मिली, जहां पार्टी ने 27 वार्ड जीतकर बढ़त बनाई।

बीजेपी के लिए भी चुनावी नतीजों में कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ के प्रभाव वाले अबोहर नगर निगम में बीजेपी ने जीत दर्ज की, जबकि अश्विनी शर्मा के गढ़ पठानकोट में पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी, हालांकि उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका। दूसरी ओर, राज्यभर में बड़ी संख्या में बीजेपी उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हुई, जो पार्टी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में लंबे समय से यह ट्रेंड रहा है कि सत्ता में मौजूद पार्टी स्थानीय निकाय चुनावों में बढ़त हासिल करती है। 2021 में कांग्रेस को इसका लाभ मिला था और अब 2026 में आम आदमी पार्टी ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शानदार जीत दर्ज की है। यह परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले AAP के लिए मनोबल बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं, जबकि विपक्षी दलों को अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत महसूस हो रही है।

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