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पुणे में फैल रही जानलेवा बीमारी ,अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति की जान ले ली

पुणे में फैल रही जानलेवा बीमारी ,अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति की जान ले ली

महाराष्ट्र के पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामलों में तेजी से वृद्धि ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 100 के पार पहुंच चुकी है। वहीं, सोलापुर जिले में इस बीमारी से एक व्यक्ति की मौत भी हो गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के कारण यह पहली मौत मानी जा रही है। मृतक व्यक्ति हाल ही में पुणे गया था। गौरतलब है कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक गंभीर बीमारी है, जिससे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट की भी मौत हुई थी। आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षण और मौजूदा हालात के बारे में।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, रविवार तक पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के कुल 101 मामले दर्ज किए गए। इनमें 68 पुरुष और 33 महिलाएं शामिल हैं। 16 मरीजों की स्थिति गंभीर है, और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। वहीं, सोलापुर में एक मरीज की मौत हो गई, हालांकि उसके संक्रमण की पुष्टि की प्रक्रिया अभी जारी है।

प्रशासन की अब तक की कार्रवाई

पुणे में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के बढ़ते मामलों को देखते हुए नगर निगम और रैपिड रेस्पांस टीम ने सिंहगढ़ रोड और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अब तक 25,578 घरों का सर्वेक्षण किया गया है। इसमें पुणे नगर निगम क्षेत्र के 15,761 घर, चिंचवड़ नगर निगम क्षेत्र के 3,719 घर और जिले के ग्रामीण इलाकों के 6,098 घर शामिल हैं।

पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट का मामला

यह बीमारी कितनी घातक हो सकती है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट को भी इसने प्रभावित किया था। शुरुआत में उनकी हालत को पोलियो का असर माना गया, लेकिन बाद की रिसर्च में यह स्पष्ट हुआ कि उनकी मौत का कारण गुइलेन-बैरे सिंड्रोम था। इस बीमारी ने उनके शरीर के निचले हिस्से को लकवाग्रस्त कर दिया था।

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के लक्षण

गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ बीमारी है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को प्रभावित करती है। इसके कारण मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और शरीर के अंग सुन्न पड़ने लगते हैं। मरीजों को हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस होती है। डॉक्टरों के अनुसार, यह बीमारी आमतौर पर जीवाणु और वायरल संक्रमण के कारण होती है, जो रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देती है।

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