पेरेंट्स एसोसिएशन का गंभीर आरोप , दिल्ली के बड़े स्कूलों ने गरीब बच्चों की सीटें हड़पीं
दिल्ली के नामी प्राइवेट स्कूलों पर एक बड़ा आरोप लगा है। दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में राजधानी के 16 निजी स्कूलों ने गरीब बच्चों के अधिकार का हनन करते हुए ईडब्ल्यूएस (EWS) कोटे की 15,127 सीटों पर उन्हें प्रवेश नहीं दिया। जबकि इन सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों को निशुल्क दाखिला मिलना चाहिए था।
एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने इस संबंध में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना, एनसीपीसीआर, एनएचआरसी और सीबीएसई के अध्यक्षों को पत्र लिखकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
आरोप क्या हैं?
एसोसिएशन का कहना है कि ये स्कूल आरक्षित सीटों का दुरुपयोग कर मोटी कमाई कर रहे हैं। इन स्कूलों को सरकार की ओर से रियायती दर पर ज़मीन इसलिए दी गई थी ताकि वे समाज के कमजोर तबकों के बच्चों को 25% सीटों पर फ्री एडमिशन दें। लेकिन इसके उलट, कई स्कूल इन सीटों को बेचते हैं, ईडब्ल्यूएस बच्चों से पूरी फीस वसूलते हैं, और उनके नाम पर मिलने वाली सरकारी सहायता भी हड़प रहे हैं।
ईडब्ल्यूएस बच्चों पर हो रहा आर्थिक शोषण
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ स्कूल किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी चीजें महंगे दामों पर बेचकर भी गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।
किन-किन स्कूलों पर लगे हैं आरोप?
यहां वे 16 स्कूल हैं, जिन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं:
- सलवान पब्लिक स्कूल, मयूर विहार
- ओपीजी वर्ल्ड स्कूल, द्वारका
- श्री वेंकटेश्वर इंटरनेशनल स्कूल, द्वारका
- जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल, सरिता विहार
- लेंसर्स कॉन्वेंट स्कूल, प्रशांत विहार
- सचदेवा पब्लिक स्कूल, रोहिणी
- सेंट जॉर्ज स्कूल, अलकनंदा
- वेंकटेश्वर इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर 10 द्वारका
- अर्वाचीन इंटरनेशनल स्कूल, दिलशाद गार्डन
- आदर्श शिक्षा निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मयूर विहार
- महाराजा अग्रसेन पब्लिक स्कूल, अशोक विहार
- महाराजा अग्रसेन मॉडल स्कूल, पीतमपुरा
- महाराजा अग्रसेन आदर्श विद्यालय, पीतमपुरा
- मैक्स फोर्ट स्कूल, पीतमपुरा
- न्यू ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, विवेक विहार
- नेशनल विक्टर पब्लिक स्कूल, आईपी एक्सटेंशन
एसोसिएशन का कहना है कि यह आंकड़ा तो केवल 16 स्कूलों तक सीमित है, लेकिन यदि सरकार गहन जांच कराए तो और भी स्कूलों की पोल खुल सकती है।
सरकार से मांग की गई है कि दोषी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हो और गरीब बच्चों को उनका हक तत्काल दिलाया जाए।